बनारस में भुखमरी के शिकार मुसहरों से जुड़े अंकरी काण्ड की धूल अभी बैठ ही रही थी कि एक और पत्रकार के ऊपर मुकदमा लाद दिया गया है. दिलचस्प है कि इस बार मुकदमा खुद पीड़ित ने दर्ज करवाया है, जिसके पक्ष में खबर लिखी गई थी.
मामला स्क्रॉल डॉट इन की संपादक सुप्रिया शर्मा का है जिन्होंने बीते 8 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गाँव में भुखमरी की एक खबर लिखी थी. इस रिपोर्ट में माला नाम की एक महिला का ज़िक्र है जो छः बच्चों की माँ है और प्रधानमंत्री के गोद लिए गाँव डोमरी की रहने वाली है.
अब माला ने सुप्रिया शर्मा के ऊपर मुकदमा दर्ज करवा दिया है. रामनगर थाने में 13 जून को दर्ज एक एफआइआर में माला ने विभिन्न धाराओं में केस किया है, जिनमें एससी एसटी कानून की दो धाराएं भी शामिल हैं.


उक्त शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि सुप्रिया शर्मा की खबर गलत है और उन्होंने उसकी गरीबी व जाति का मज़ाक उड़ाया है. माला का कहना है कि उक्त खबर से उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.
ऐसा आम तौर से नहीं देखा जाता कि जिस पीड़ित के पक्ष में खबर लिखी जाए मुकदमा उसी की तरफ से हो. इस मामले में यह केस अपने आप में दुर्लभ है. इससे पहले आम तौर से प्रशासन की तरफ से भुखमरी की ख़बरों के खंडन का चलन रहा है, जैसा लॉकडाउन के शुरूआती चरण में जन्संदेश टाइम्स के स्थानीय संपादक विजय विनीत की खबर के मामले में हुआ रहा.

विजय विनीत ने लॉकडाउन की शुरुआत में ही बनारस के कोइरीपुर के मुसहरों की खबर लिखी थी जो भूख के चलते अंकरी नाम की जंगली घास खाने को मजबूर थे. इस खबर पर अच्छा ख़ासा बवाल खड़ा हो गया था. विनीत को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की तरफ से कानूनी कार्यवाही का नोटिस दे दिया गया और खुद जिलाधिकारी ने अंकरी की घास खाते हुए अपने बच्चे के साथ अपनी तस्वीर जारी की यह दिखने के लिए कि अंकरी ‘घास’ नहीं, ‘दाल’ है.

मामला आगे बढ़ा और अदालत में गया. पत्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ़ एक शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी की गई. मुसहर समुदाय की भूख के सवाल पर सरकार की खूब छीछालेदर हुई.
अब दो महीने के भीतर ही सुप्रिया शर्मा का दूसरा केस है जहाँ पत्रकार की लिखी खबर को फर्जी बताया जा रहा है लेकिन इस बार ऐसा आरोप लगाने वाला प्रशासन नहीं, खुद एक पीड़ित है. सुप्रिया शर्मा ने अपनों खबर की सत्यता का दावा करते हुए कहा है कि यह एफआइआर स्वतंत्र पत्रकारिता को धमकाने और डराने का प्रयास है जो लॉकडाउन के दौरान वंचित समुदाय पर रिपोर्ट कर रही है.
अब सवाल ये है कि अगर यह मुकदमा वाकई माला ने दर्ज करवाया है स्वेच्छा से, तब क्या सुप्रिया शर्मा खुद को सही साबित करने के लिए माला के खिलाफ जाएंगी? सवाल ये भी है सुप्रिया शर्मा की रिपोर्ट अगर सही है, तो माला के पीछे कौन है?


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