चक्का जाम ने फिर साबित किया, देश भर के किसान एकजुट हैं इन कानूनों के खिलाफ: SKM


74वां दिन, 6 फरवरी 2021

संयुक्त किसान मोर्चे के चक्का जाम के आह्वान को आज देशभर में समर्थन मिला। कल संसद में कृषि मंत्री द्वारा यह देशभर के किसानों के संघर्ष का अपमान किया गया कि केवल एक राज्य के किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है। परंतु आज के देशव्यापी चक्का जाम ने एक बार फिर साबित किया कि देश भर के किसान इन कानूनों के खिलाफ एकजुट है। किसान पूरी तरह शांतमयी और अहिंसक रहे।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व बिहार में चक्का जाम का कार्यक्रम पूर्णतः सफल रहा। चंपारन, पूर्णिया, भोजपुर, कटिहार समेत सम्पूर्ण क्षेत्र में किसानों द्वारा चक्का जाम किया गया। मध्यप्रदेश में 200 से ज्यादा जगहों पर किसान एकजुट हुए। महराष्ट्र में वर्धा, पुणे व नासिक समेत अनेक जगहों पर किसानों ने चक्का जाम का नेतृत्व किया। चक्का जाम की सफलता आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल व तमिलनाडु में भी देखने को मिली। कर्नाटक में बैंगलोर व 25 जिलों में किसानों का यह कार्यक्रम सफल रहा। पंजाब व हरियाणा में किसान, मजदूर, छात्र संगठनों ने आगे आते हुए सैंकड़ो सड़के जाम की। राजस्थान में पीलीबंगा, बींझबायला, उदयपुर समेत दर्जनों जगह किसानों ने सड़के जाम की। ओडिशा के भुबनेश्वर समेत कई जगह किसानों ने शांतमयी चक्का जाम किया।

हम बागपत के 150 प्रदर्शनकारी किसानों को पुलिस द्वारा गए नोटिस की निंदा करते है।

संयुक्त किसान मोर्चा की अब तक की जानकारी के अनुसार 127 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो चुकी है वहीं 25 व्यक्ति लापता है। अब तक संकलित जानकारी के अनुसार इस आंदोलन में 204 आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है परंतु सरकार अभी भी किसानों के दर्द को अनदेखा कर रही है। बलविंदर सिंह जो कि पिछले दिनों ही किसान आंदोलन में शहीद हुए हैं, उनकी मां और भाई पर तिरंगे के अपमान संबंधी पुलिस केस दर्ज किया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा तुरंत केस वापस करने की मांग करता है और किसान परिवार को हरसंभव सहायता देने की घोषणा करता है।

सरकार और असामाजिक तत्त्वों की तमाम साजिशों के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा तीनो कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और MSP की कानूनी गारंटी की मांग पर कायम है। हम देश विदेश से किसान आंदोलन को मिल रहे समर्थन पर हम सभी का आभार व्यक्त करते हैं। किसान कई महीनों से ये आंदोलन कर रहे हैं, अनेक किसान शहीद हो गए हैं। यह शर्म की बात है कि सरकार के इशारे पर कुछ लोग आंतरिक मामला बताकर इस आंदोलन को दबाना चाहते हैं परंतु यह समझना जरूरी ही कि लोकतंत्र में लोक बड़े होते हैं न कि तंत्र।

किसान एकता ज़िंदाबाद


डॉ दर्शन पाल
संयुक्त किसान मोर्चा
9417269294


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →