पुस्तक समीक्षा: गौहर रज़ा की ‘मिथकों से विज्ञान तक’ को पढ़ते हुए

स्कूल के स्तर तक तो हम सब लोग अनिवार्य रूप से विज्ञान की पढ़ाई करते हैं लेकिन विज्ञान का वह ज्ञान हमारे जीवन और बुद्धि-विवेक का सहज हिस्सा क्यों नहीं बन पाता? उन सिद्धांतों को पढ़ने और जानने के बाद भी हम अपने रूढ़िवादी और परंपरा से प्राप्त विचारों को ही जीवन में क्यों ढोते रहते हैं?

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