हमरा के जगरनथवा बो क देले बीया: वायरल संगीत के पीछे छुपा सामाजिक अपराध

‘जगरनथवा बो’ का मामला भी लेनदेन के विवाद से ही जुड़ा है लेकिन उसने जादू-टोना, तंत्र-मंत्र का तड़का लगाकर इसे अलग ही तरीके से परोस दिया है। इससे पीछे मीडिया के जरिये पाखंडी धर्माचार्यों और ज्योतिषियों का दुष्प्रचार भी है, जो लोगों को मानसिक रूप से घेरे हुए है।

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महाराष्ट्र: सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों की पुनर्वास बस्ती में विकल्प की धुन

नर्मदा नवनिर्माण अभियान द्वारा चलाए जा रहे, ये स्कूल कभी भी सरकारी शिक्षा का स्थायी विकल्प बनने के लिए नहीं बनाए गए थे। वे उस खालीपन के जवाब में पैदा हुए, जिसे राज्य ने छोड़ दिया था। आज मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र के जलसिंधी, जीवन नगर, सवारिया दीगर, भाभरी, थुवानी, मणिबेली और मध्य प्रदेश के खरया भादल गांव में साथ जीवनशालाएँ चल रही हैं।

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पंजाब: हरियाणा के साथ पानी बंटवारे पर भगवंत मान का रुख सवालों के घेरे में

भगवंत मान के बदले हुए रुख पर विपक्षी राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने आरोप लगया है कि भगवंत मान ने गुरु तेगबहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के अनुयायी भाई कन्‍हैयाजी के संदर्भ को पंजाब के हिस्से का पानी अन्य राज्य हरियाणा को समर्पण करने  लिए तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है, जो अपमानजनक धर्मद्रोही है।

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MNREGA का अंत: एक कानून नहीं, एक नई चेतना पर वार!

हाल में केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून को वापस ले लिया और VB-ग्राम-जी नाम का एक नया कानून ला दिया। हर रोज हिंदी दैनिक अखबार इस नए कानून की तारीफ के पुलिंदे बाँध रहे हैं। आइए जानें कि इस कानून की हकीकत क्या है।

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मनरेगा से कमजोर लोगों को मिले राजनीतिक अनुभव की सीख आसानी से मिटने वाली नहीं है

आज जब इस क़ानून को कमज़ोर किया जा रहा है या ख़त्म किया जा रहा है, तो सिर्फ़ रोज़गार नहीं छीना जा रहा। वह पूरा राजनीतिक अनुभव, वह आत्मविश्वास, वह सामूहिक ताक़त भी छीनी जा रही है। लेकिन यह भी सच है कि इस प्रक्रिया में लोगों ने यह सीख लिया है कि संगठित होकर बोलना ही रास्ता है। यह सीख आसानी से मिटने वाली नहीं है।

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मनरेगा: रोजगार से कहीं ज्यादा, आजादी का एक अनुभव

इन क़ानूनों के बाद मजदूरों का सरकार से विश्वास टूटना स्वाभाविक है। यही टूटा हुआ विश्वास आने वाले समय में एक बड़े मजदूर आंदोलन में बदलेगा- हमें इस पर पूरा भरोसा है।

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दो बरस बाद बेतलहेम में क्रिसमस : नया साल, नये सपने, उम्मीद और हौसले के नाम!

व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए शायद यह पहला नया बरस है और पहली क्रिसमस है जब मैं बहुत खुश हूँ। इसकी वजह है फ़लस्तीन से आया एक ईमेल जिसमें बेतेलहेम की एक दोस्त ने एक वीडियो भेजा है और साथ ही बताया है कि दो साल से ग़ज़ा में हो रहे नरसंहार के चलते बेतेलहेम में और सारे फ़लस्तीन में क्रिसमस नहीं मनाया गया था। इस बार बेतेलहेम में क्रिसमस ट्री सजाई गई और क्रिसमस मनायी गई।

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SIR, सामाजिक न्याय और भारतीय गणतंत्र का भविष्य: चुनौतियों का विश्लेषण

जो समूह आज देश में प्रभावी है, उसका मुख्य उद्देश्य जनता को अलग-थलग करना और सभी संभावित धन (खनिज धन, भूमि पूंजी और अवसर) पर कब्जा करना है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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समाज में फैल रहे असहिष्णुता के ज़हर को कैसे रोकें? विरोधी विचारों का सह-अस्तित्व कैसे कायम हो?

सदियों से इस धरती पर – जिसे हम आज भारत कहते हैं – परस्पर विरोधी विचारों, मान्यताओं और दर्शनों का सहअस्तित्व था, उनके बीच गर्मजोशी से बहसें हुआ करती थीं और ये तमाम बहसें किन्हीं स्वीकार्य तौर-तरीकों के तहत की जाती थीं। मतलब, दूसरे पक्ष की बात को सुनना, उसके खण्डन के लिए तर्क देना और फिर अपनी बात रखना … यह बेहत सख़्ती से लेकिन खुद की और प्रतिपक्षी की गरिमा को बनाए रखते हुए किया जाता था।

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दीपोत्सव 2025: ‘रिकॉर्ड’ बनाने की प्रवृत्ति UP में विकास की प्राथमिकताओं को कहीं पीछे न छोड़ दे!

सरकार की प्राथमिकताएँ अभी भी यूपी को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की है और इसीलिए महाकुंभ और दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम को यूपी की पहचान बनाने की कोशिश सरकार करती है। इससे क्या यूपी का कोई उज्ज्वल भविष्य हो सकता है?

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