Benares Grapevine-4: रोडशो का झूठ और झाड़ू चलने का डर

माना जा रहा है कि नरेंद्रभाई मोदी बनारस से जीत रहे हैं, लेकिन उनकी जीत का जश्‍न मनाने वाले इस शहर में इतने भी नहीं कि बीएचयू गेट से रविदास …

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Benares Grapevine-2: परेशान चेहरे और लड़खड़ाते घुटने

अस्‍सी चौराहे स्थित पप्‍पू की दुकान पर एक लंबा सा आदमी चाय पीने आया। उसकी लंबाई औसत से कुछ ज्‍यादा थी। एक व्‍यक्ति ने उसे देखकर दूसरे से कहा, ”ई …

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Benares Grapevine-1: सांस्‍कृतिक मार्च और फ्लैग मार्च के बीच

अभिषेक श्रीवास्‍तव  कल रात शहर में पुलिस का फ्लैग मार्च हुआ। रात साढ़े दस बजे के करीब जब हमने दुर्गाकुंड से लंका की ओर जाते हुए नीली-पीली बत्तियों वाली सायरन …

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लोकसभा चुनाव वाया बनारस: बुद्धिजीवियों से एक सवाल

अभिषेक श्रीवास्‍तव  जिस देश में हवा रात भर में बदलती है, हमारे पास फिर भी एक महीना है। हम लोग, जो कि वास्‍तव में फासीवाद को लेकर चिंतित हैं, जो …

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चुनावी बिसात पर सजी मोहरें और हिंदू राष्ट्र का सपना

आनन्‍दस्‍वरूप वर्मा  16वीं लोकसभा के लिए चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है और 7 अप्रैल से मतदान की शुरुआत भी हो चुकी है। इस बार का चुनाव इस दृष्टि …

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बनारस धूल बैठने का इंतज़ार कर रहा है

अभिषेक श्रीवास्‍तव  बनारस से लौटकर  बनारस में ज्ञान की खोज कबीर की देह पर गुरु रामानंद के पैर पड़ जाने जैसी कोई परिघटना होती है। यहां सायास कुछ भी नहीं …

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साम्राज्यवादी वैश्वीकरण के दौर में भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता

अर्जुन प्रसाद सिंह ‘अंग्रेजों की जड़े हिल चुकी हैं। वे 15 सालों में चले जायेंगे, समझौता हो जायेगा, पर इससे जनता को कोई लाभ नहीं होगा। काफी साल अफरा-तफरी में …

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