NHRC ने COVID-19 की दूसरी लहर में स्वास्थ्य अधिकार पर जारी की दूसरी एडवाइजरी

मानवाधिकार आयोग ने कोविड-19 महामारी का मानवाधिकारों पर प्रभाव और भविष्य के परिणामों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई थी जिसमें सामाजिक संस्थाओं, नागरिक संस्थाओं, स्वतंत्र विशेषज्ञ और संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि लाशों के ढेर पर सम्पन्न कराया गया यूपी का पंचायत चुनाव?

वहां किसी तरह की कोई सोशल डीस्टेंसिंग नहीं थी, बहुत सारे लोग वहां बिना मास्क के घूम रहे थे, सामग्री वितरण, हस्ताक्षर करते समय लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़ जा रहे थे। मैं क्या कोई भी चाह कर भी किसी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रख सकता था। यहीं से मुझे कोरोना से मरने वाले शिक्षकों के कारण नजर आने लगे।

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बीते दो हफ्ते में कोरोना के हाथों मारे गए सौ बेनाम पत्रकारों को क्या आप जानते हैं?

बीते दो हफ्तों में भारत में मारे गए 50 पत्रकारों की सूची बहुत छोटी है। अगर इसमें राज्‍यों में स्‍थानीय स्‍तर पर मारे गए पत्रकारों की उपलब्‍ध सूचनाओं को जोड़ लें तो संख्‍या 96 तक पहुंचती है यानी रोजाना छह से ज्‍यादा पत्रकारों की मौत।

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”सस्ती जान की कुछ कीमत होती होगी, हमारी वह भी नहीं है” : UP के एक अध्यापक का पत्र

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कोरोना का विस्फोट जब होगा तो क्या होगा, इसकी केवल कल्पना की जा सकती है। अभी केवल गोरखपुर, आजमगढ़, बनारस, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद में लोग ऑक्सीजन और हॉस्पिटल बेड के लिए दौड़ रहे हैं और जब यह दृश्य उत्तर प्रदेश की ग्रामीण जनता के साथ घटेगा तब क्या होगा?

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बेकाबू हो चुकी महामारी और मिस्टर मोदी: भारत पर The Guardian का संपादकीय

भारत एक ऐसा विशाल, जटिल और विविध देश है जिसे सबसे शांत दौर में भी चला पाना मुश्किल होता है, फिर राष्‍ट्रीय आपदा की तो क्‍या ही बात हो। आज यह देश कोरोना वायरस और भय की दोहरी महामारी से जूझ रहा है।

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SKM की हरियाणा सरकार के साथ बैठक, सिंघु बॉर्डर पर एक तरफ से हटेगा बैरिकेड

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आज शाम हरियाणा प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ऑक्सिजन, एम्बुलेंस व अन्य जरूरी सेवाओं के लिए GT करनाल रोड़ का एक हिस्सा खोला जाएगा जिस पर दिल्ली पुलिस ने कठोर बैरिकेड लगाए हुए हैं।

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विफल राज्य, मजदूरों के पलायन और तबाही के बीच 150 साल के लेनिन को याद करने के संदर्भ

लेनिन को याद करने का अर्थ सिर्फ मजदूर क्रांति के सपने को साकार करना नहीं है। अपने समाज को समझने का रास्ता भी है। राज्य की प्रकृति समझना है तो लेनिन को जरूर पढ़िए।

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IIT-BHU प्रशासन PhD के छात्र-छात्राओं से हॉस्टल खाली करने का आदेश वापस ले: SFC

हॉस्टल में रह रहे PhD के कुछ छात्र-छात्राओं ने प्रशासन के इस फैसले के विरुद्ध हॉस्टल के अंदर ही आंदोलन शुरू कर दिया है और खाली करने से इनकार किया है।

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संक्रमण काल: बदलती हुई दुनिया और उभरते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य पर जिरह

हिंदी में अपने तरह के इस अनूठे कॉलम में यह बात देखने की रहेगी कि भविष्य की दुनिया किन तकनीकी और आर्थिक प्रक्रियाओं के बीच निर्मित हो रही है और किस प्रकार का एक नया सामाजिक, राजनीतिक (और साहित्यिक-सांस्कृतिक भी) परिदृश्य इस बीच आकार ले रहा है।

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भारत में कानून के राज की अवमानना हो रही है: SC के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर

हर साल सिविल सोसायटी वॉचडॉग कॉमन कॉज़, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) के सहयोग से स्टेटस ऑफ पुलिसिंग रिपोर्ट (एसपीआईआर) जारी करती है. रिपोर्ट के पहले खंड का 19 अप्रैल को एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व और कार्यरत पुलिसकर्मियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया. इस रिपोर्ट को नीचे पढ़ा जा सकता है.

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