Vinod Kumar Shukla

वह खिड़की जो भीतर की ओर खुलती थी : स्‍मृतिशेष विनोद कुमार शुक्ल

उनका लेखन किसी भी तरह के नाटकीय तंत्र या शैलीगत छल-कपट से दूर रहा। उनका लेखन समय की रेखाओं में धीरे-धीरे चलता था। उनके कथ्य में पात्रों का नाम होना या न होना, घटनाओं का बड़ा मोड़ होना या न होना, सब इसलिए था ताकि पाठक उस अंतराल में बैठकर खुद को सुन सके।

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लोकसभा में राहुल गांधी के उठाए सवाल लोकतंत्र के लिए क्‍यों जरूरी हैं

यदि भारत सच में एक जीवंत लोकतंत्र है, तो उसे राहुल गांधी के उठाए सवालों को सुनना और समझना चाहिए। सत्‍ता जब सवालों से डरने लगे, तो वह संवादहीनता और आत्ममुग्धता की दिशा में बढ़ती है। लोकतंत्र का क्षरण वहीं से प्रारंभ होता है।

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‘कोचिंग जाने वाले बच्‍चे’ उर्फ बिहार से दिल्‍ली तक बिखरी अनसुनी आवाजें, सपने और संघर्ष

राजधानी एक्सप्रेस वाया उम्मीदपुर हाल्ट   उन लाखों युवाओं की स्मृतियों का दस्तावेज है जो अपने भविष्य के लिए वर्तमान को गिरवी रख चुके हैं। यह उपन्यास हमें बताता है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी सिर्फ एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संघर्ष भी है।

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‘अगर तुम पंजाब को समझना चाहते हो, तो लाशें गिनते जाओ’!

हथियार आये कैसे? हरित क्रान्ति में क्रान्ति कहां थी? सीमा पर बसे लोगों को हम किस देश का नागरिक मानते हैं? इन समस्याओं को बने रहने देने में केंद्र या राज्य सरकारों का कितना योगदान है? ऐसे अनगिन प्रश्न इस किताब में हैं जो हमें पंजाब के साथ-साथ स्थानीय जगहों से जुड़े मसलों पर विचारने के लिए प्रेरित करते हैं।

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बुधिनी: एक दुर्लभ मुलाकात की एक अभूतपूर्व साहित्यिक परिकथा

लेखिका सारा जोसेफ ने वापस जाकर बुधिनी के बारे में अधिक से अधिक पढ़ा। उनसे सम्बंधित सूचनाओं का संधान किया। उन्होंने उस जगह की यात्रा का निर्णय किया जहां उनकी नायिका बुधिनी रहती थी। उन्हें यह बताया गया था कि उसकी मृत्यु वर्षों पूर्व हो गयी, हालाँकि उनकी इस यात्रा में अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ तब आया जब वह सद्यः जीवित बुधिनी से स्वयं मिलीं।

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No Land’s People: डिटेन्शन कैंप का रास्ता कानून से होकर जाता है

पूरी किताब नागरिकता ढूंढो के सरकारी और प्रायोजित अभियान की कलई खोलती है। खासकर ‘डिटेन्शन और डिपोर्टेशन’ पर विस्तृत चर्चा करने वाला अध्याय जब इस सरकारी और राजनीतिक कवायद से उपजी निराशा और हताशा को बयान करता है, तब कलेजा चाक हो उठता है।

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