गांधीवाद को भ्रम की टोपी पहना रहे आनंदमार्गी प्रोफेसर!
अभिषेक रंजन सिंह जनता को सब्ज़बाग़ दिखाने में माहिर आम आदमी पार्टी अब गांधीवादियों को भी बरग़लाने लगी है. हाथ में तिरंगा, सिर पर गांधी टोपी और मुंह से राजनीतिक …
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अभिषेक रंजन सिंह जनता को सब्ज़बाग़ दिखाने में माहिर आम आदमी पार्टी अब गांधीवादियों को भी बरग़लाने लगी है. हाथ में तिरंगा, सिर पर गांधी टोपी और मुंह से राजनीतिक …
Read Moreये 18 अप्रैल सन 2013 की तपती दोपहर है और मैं नांदेड़ से चली उस ट्रेन के स्लीपर डिब्बे में बैठा हूं जिसकी पहली से लेकर आखिरी बोगी तक चौड़े …
Read Moreअभिषेक श्रीवास्तव इतिहास गवाह है कि प्रतीकों को भुनाने के मामले में फासिस्टों का कोई तोड़ नहीं। वे तारीखें ज़रूर याद रखते हैं। खासकर वे तारीखें, जो उनके अतीत की …
Read Moreअभिषेक श्रीवास्तव इतिहास गवाह है कि प्रतीकों को भुनाने के मामले में फासिस्टों का कोई तोड़ नहीं। वे तारीखें ज़रूर याद रखते हैं। खासकर वे तारीखें, जो उनके अतीत की …
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आनंद तेलतुम्बड़े हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण चिंतकों में एक हैं। पिछले दिनों उनके कहे-लिखे पर काफी विवाद खड़ा किया गया है। प्रस्तुत लेख उन्होंने ”समयांतर” के लिए लिखा था …
Read More11 फरवरी 2014 (फोटो: साभार भड़ास4मीडिया) प्रिय साथी, आप पिछले पांच दिनों से सामाजिक न्याय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर नयी दिल्ली के जंतर-मंतर में अनशन पर बैठे …
Read Moreमारुति प्रबंधन के सताए मज़दूरों के जले पर नमक छिड़क गए योगेंद्र यादव न कहीं कोई कवरेज हुई, न किसी को कोई ख़बर। न टीवी के कैमरे आए, न अख़बारों …
Read MoreA writer’s life is a highly vulnerable, almost naked activity. We don’t have to weep about that. The writer makes his choice and is stuck with it. But it is …
Read Moreअभिषेक श्रीवास्तव 1 असहमति- एक ख़तरनाक बात थी पिछले दौर में। उन्होंने असहमति के पक्ष में और इसके दमन के विरुद्ध ही अब तक की है राजनीति। वे असहमत …
Read Moreप्रेम भारद्वाज हमारे समय के तमाम लिक्खाड़ों के बीच प्रेम भारद्वाज चुपके से अपना काम कर रहे हैं। एक अदद साहित्य पत्रिका ‘पाखी’ का संपादन करते हुए यूं तो उन्होंने …
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