आपराधिक कानून में प्रस्तावित सुधार और गठित समिति के संयोजन पर NAPM का गृह मंत्री को पत्र
“मौजूदा सुधारों के लिए जिस जल्दबाज़ी और अपारदर्शी तरीके को अपनाया जा रहा है, हम उससे चिंतित हैं। हम आपसे इस प्रक्रिया को त्यागने का आग्रह करते हैं।”
Read MoreJunputh
“मौजूदा सुधारों के लिए जिस जल्दबाज़ी और अपारदर्शी तरीके को अपनाया जा रहा है, हम उससे चिंतित हैं। हम आपसे इस प्रक्रिया को त्यागने का आग्रह करते हैं।”
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त्रेपन के निधन से हमने एक सच्चा, ईमानदार, संघर्षशील, जीवट साथी खो दिया है किन्तु उनकी जीवटता और साहित्य राज्य का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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चिकित्सा विभाग में किसी तरह चिकित्सकों को मना तो लिया गया, लेकिन मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर चिकित्सकों के साथ हो रहे अन्याय की सुध लेने की गुहार लगायी है।
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समूह ने कारवां की महिला स्टाफर के विरुद्ध शारीरिक और यौन हिंसा की
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एक ओर इलीना जीवनपर्यन्त पितृसत्तात्मक दमन और अधीनता को संबोधित करती रहीं; और, दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों और जीविका के स्रोतों को बचाने में लगे जन आंदोलनों को समर्थन देती रहीं.
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सिविल सोसाइटी संगठन उड़ीसा श्रमजीवी मंच, महिला श्रमजीवी मंच, सोनभद्र विकास संगठन और आत्मशक्ति ट्रस्ट ने इस घटना की निंदा की है एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं बुलंदशहर के जिलाधिकारी को टैग करते हुए ट्विट करते हुए सुदीक्षा और उनके परिवार को तत्काल न्याय देने की मांग सरकार से की है।
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केवाईएस ने डीयू के उदासीन रवैये की कड़ी भर्त्सना की! एमएचआरडी और यूजीसी से तुरंत हस्तक्षेप कर छात्रों का भविष्य बचाने की मांग की!
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मजदूर एकता केंद्र मांग करता है कि श्रम-क़ानूनों के स्थगन को तुरंत वापस लिया जाये| साथ ही, राज्य सरकारों से कंपनियों और कॉर्पोरेटों के हित में मजदूरों के अति-शोषण की इजाज़त देने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करता है|
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भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक दिन ‘कारपोरेट भगाओ-किसान बचाओ’ के नारे पर पूरे देश के सैकड़ों किसान और मजदूरों संगठनों के आव्हान पर उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड, ओडिशा, कर्नाटक व महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट व सहमना संगठनों द्वारा लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाया गया।
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उनके नेतृत्व में चले स्वतंत्रता संग्राम में गुरिल्ला क्रांतिकारियों ने लाठी-डंडे, तलवार, फरसा, भाला, किर्च आदि लेकर मनोरमा नदी पार कर रहे अंग्रेज अफसरों पर 10 जून, 1857 को धावा बोल दिया जिसमें लेफ्टिनेंट लिंडसे, लेफ्टिनेंट थामस, लेफ्टिनेंट इंगलिश, लेफ्टिनेंट रिची, लेफ्टिनेंट काकल और सार्जेंट एडवर्ड की मौके पर मौत हो गई थी।
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