किसान आंदोलन के समर्थन गाजीपुर बॉर्डर पहुंची उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, चलाएगी अभियान

गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के मंच पर आंदोलन के प्रखर चर्चित नेता राकेश टिकैत एवं उनके साथियों ने उत्तराखंड की पहल का स्वागत किया।

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उत्तर बंगाल: श्रमजीवी अधिकार यात्रा में नये श्रम और कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार को चेतावनी

सरकार ने 44 श्रम कानूनों को उद्योगपति और पूंजीपतियों को फायदा पहुँचाने के लिए ख़त्म कर दिया। जिससे कि मजदूरों का भरपूर शोषण होगा और वे मौत के मुहाने पर पहुंच जायेंगे। उनके सभी अधिकारों को इस सरकार ने निर्ममता से कुचलने का काम किया है। अब किसान विरोधी कृषि कानून लाकर उन्हें भी सड़क पर ला दिया है।

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न्यूज़क्लिक पर ED की छापेमारी प्रेस की आज़ादी पर हमला है: DUJ

सरकार लगातार अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने के लिए पत्रकारों पर देशद्रोह का केस करवा रही है और अपनी आलोचना को दबाने के लिए ट्विटर, यूट्यूब आदि सोशल मीडिया पर भी विपरीत आवाजों को कुचलने के प्रयास में लगी हुई है.

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योजनाकारों, ठेकेदारों, नेताओं, सरकारों द्वारा आमंत्रित आपदा में शहीद हुए लोगों के लिए एक शोक वक्तव्य

ग्लेशियर टूटने की बात जमकर के प्रचारित हो रही है, किंतु हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी में इतनी बड़ी परियोजनाओं को बनाने की, अनियंत्रित विस्फोटकों के इस्तेमाल की, जंगलों को काटने की, पर्यावरणीय कानूनों व नियमों की पूरी उपेक्षा पर न सरकारों का कोई बयान है न कहीं और ही चर्चा हुई।

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इलाहाबाद हाइ कोर्ट का आदेश दिखाता है कि UP सरकार ने प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया: NAPM

न्यायालय का यह आदेश यह स्थापित करता है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को 26 जनवरी के प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए 19 जनवरी और उसके बाद जारी किये गए आदेश कितने निरर्थक और प्राकृतिक न्याय के सूत्रों का उल्लंघन करने वाले थे.

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अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सरकारी हमले के खिलाफ़ लेखक संगठनों का संयुक्त बयान

हम अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के इस्तेमाल की निंदा करते हैं और ज़ोर देकर कहना चाहते हैं कि प्रवर्तन निदेशालय को अपना काम ज़रूर करना चाहिए, पर जाँच को उत्पीड़न का हथियार बनाना हर तरह से निंदनीय है।

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प्रधानमंत्री ने किसानों को परजीवी कहकर अन्नदाता का अपमान किया है: सुनीलम

यदि स्वतंत्रता आंदोलन नहीं होता तो देश आजाद नहीं होता। 1974 का आंदोलन नहीं होता तो देश में लोकतंत्र की बहाली नहीं होती। 1894 में अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए भू-अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन नहीं होता तो नया भू-अधिग्रहण कानून नहीं बनता। जन लोकपाल बिल को लेकर अन्ना आंदोलन नहीं होता तो देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ वातावरण नहीं बनता। लोकपाल की आवश्यकता स्थापित नहीं होती।

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शशि थरूर, राजदीप सहित अन्य को SC से अंतरिम राहत, न्यूज़क्लिक पर ED का छापा

एक तरफ मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने जहां कांग्रेस सांसद शशि थरूर, पत्रकार मृणाल पांडे, राजदीप सरदेसाई, जफ़र आगा, विनोद जोस, अनंतनाथ और परेश नाथ पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज देशद्रोह और अन्य मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, वहीं आज सुबह ईडी ने समाचार वेबसाइट न्यूज़क्लिक के कार्यालय में छापेमारी की.

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भारत आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द की गौरवशाली परम्परा का देश है: डॉ. आरिफ

असंगठित खेत्र अथवा भवन निर्माण में लगे मजदूरो, खेती किसानी के कार्य में लगे भूमिहीन किसान व खेतिहर मजदूरों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली अति आवश्यक है वर्तमान दौर में कार्पोरेट घरानों के दबाव में इस व्यवस्था पर अस्तित्व का संकट आसन्न है,

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