इलाहाबाद हाइ कोर्ट का आदेश दिखाता है कि UP सरकार ने प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया: NAPM

न्यायालय का यह आदेश यह स्थापित करता है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को 26 जनवरी के प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए 19 जनवरी और उसके बाद जारी किये गए आदेश कितने निरर्थक और प्राकृतिक न्याय के सूत्रों का उल्लंघन करने वाले थे.

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अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सरकारी हमले के खिलाफ़ लेखक संगठनों का संयुक्त बयान

हम अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के इस्तेमाल की निंदा करते हैं और ज़ोर देकर कहना चाहते हैं कि प्रवर्तन निदेशालय को अपना काम ज़रूर करना चाहिए, पर जाँच को उत्पीड़न का हथियार बनाना हर तरह से निंदनीय है।

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प्रधानमंत्री ने किसानों को परजीवी कहकर अन्नदाता का अपमान किया है: सुनीलम

यदि स्वतंत्रता आंदोलन नहीं होता तो देश आजाद नहीं होता। 1974 का आंदोलन नहीं होता तो देश में लोकतंत्र की बहाली नहीं होती। 1894 में अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए भू-अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन नहीं होता तो नया भू-अधिग्रहण कानून नहीं बनता। जन लोकपाल बिल को लेकर अन्ना आंदोलन नहीं होता तो देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ वातावरण नहीं बनता। लोकपाल की आवश्यकता स्थापित नहीं होती।

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शशि थरूर, राजदीप सहित अन्य को SC से अंतरिम राहत, न्यूज़क्लिक पर ED का छापा

एक तरफ मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट ने जहां कांग्रेस सांसद शशि थरूर, पत्रकार मृणाल पांडे, राजदीप सरदेसाई, जफ़र आगा, विनोद जोस, अनंतनाथ और परेश नाथ पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज देशद्रोह और अन्य मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, वहीं आज सुबह ईडी ने समाचार वेबसाइट न्यूज़क्लिक के कार्यालय में छापेमारी की.

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भारत आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द की गौरवशाली परम्परा का देश है: डॉ. आरिफ

असंगठित खेत्र अथवा भवन निर्माण में लगे मजदूरो, खेती किसानी के कार्य में लगे भूमिहीन किसान व खेतिहर मजदूरों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली अति आवश्यक है वर्तमान दौर में कार्पोरेट घरानों के दबाव में इस व्यवस्था पर अस्तित्व का संकट आसन्न है,

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न्यूनतम मजदूरी के मुद्दे पर उत्तरी बंगाल के चाय बागानों में शुरू हुआ केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान

मौजूदा स्थिति में मजदूरों को 580 रुपये की न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए लेकिन भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की न्यूनतम मजदूरी दर को 178 रुपये कर दिया है। दूसरी ओर इसी पार्टी के दार्जीलिंग सांसद राजू बिष्ट 380 रुपये की न्यूनतम मजदूरी की बात कर के मजदूरों के बीच झूठा प्रचार कर रहे हैं।

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सरकार का अड़ियल रवैया ही आंदोलनजीवी पैदा कर रहा है: SKM

अगर सरकार अब भी किसानों की मांगों को स्वीकार करती है, तो किसान वापस जाकर पूरी मेहनत से खेती करने के लिए अधिक खुश होंगे। यह सरकार का अड़ियल रवैया है जिसके कारण ये आंदोलन लंबा हो रहा है जो कि आंदोलनजीवी पैदा कर रहा है।

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नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुए ऐक्टिविस्ट दम्पत्ति ने शुरू किया बेरोजगारी मुक्त काशी अभियान

नोबेल पीस प्राइज़ वॉच ने 2021 के नोबेल शांति पुरस्‍कारों के लिए जिन 50 व्‍यक्तियों के नाम शॉर्टलिस्‍ट कर के नोबेल कमेटी को भेजे हैं उनमें दो नाम भारत से भी हैं और दोनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस से हैं- डॉ. लेनिन रघुवंशी और श्रुति नागवंशी

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चक्का जाम ने फिर साबित किया, देश भर के किसान एकजुट हैं इन कानूनों के खिलाफ: SKM

कल ससंद में कृषि मंत्री द्वारा यह देशभर के किसानों के संघर्ष का अपमान किया गया कि केवल एक राज्य के किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है। परंतु आज के देशव्यापी चक्का जाम ने एक बार फिर साबित किया कि देश भर के किसान इन कानूनों के खिलाफ एकजुट है। किसान पूरी तरह शांतमयी और अहिंसक रहे।

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इंदौर: किसान-मजदूर संगठनों ने किया चक्काजाम, कृषि कानून वापस न होने पर आंदोलन होगा तेज

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून देश को बर्बाद करने वाले कानून हैं और यदि यह लागू किए गए तो ना केवल किसानी बर्बाद होगी बल्कि मजदूर छोटे दुकानदार और आम आदमी रोजी रोटी के लिए मोहताज हो जाएगा तथा खेती किसानी पर कारपोरेट का कब्जा हो जाएगा। इसलिए इसका आंदोलन बिल वापस लेने तक चलाया जाना जरूरी है।

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