उनके पेट में दांत है, लेकिन वे खुद चक्रव्यूह के भीतर हैं!

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, जो कि पिछले 15 सालों से बिहार के सत्ता पर काबिज है और जिसका नेतृत्व सुशासन बाबू फेम “नीतीश कुमार” सफलतापूर्वक करते आए हैं, इस बार अपने भीतर ही एक चक्रव्यूह रचे हुए है। इसका मूल मक़सद नीतीश जी को निपटा देना है।

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ये जनसैलाब कुछ कहता है…

इस बार मीडिया संदेहास्पद स्थिति में है। भाजपा नेताओं की चुनावी रैलियों को तो मीडिया तवज्जो दे रहा है मगर तेजस्वी की रैलियों को ऐसे दरकिनार कर दे रहा है जैसे उसे कवर नहीं करना चाहता।

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एक शासक को काम करने के लिए आखिर कितने वर्ष चाहिए?

यह स्थिति केवल बिहार में नहीं है, लगभग पूरी दुनिया में है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को अभी और काम करना है। रूस में पुतिन दशकों से बने हैं और अभी हटना नहीं चाहते। चीन में शी जिनपिंग ने आजीवन गद्दी पर बने रहने का अधिकार एक ही बार में हासिल कर लिया है। ये सब थोड़े से उदाहरण हैं।

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आधे घंटे की प्रेस वार्ता में 14 बार नीतीश कुमार का नाम! ये ‘राष्ट्रऋषि’ का प्रेम है या…?

कहा जाता है कि चोर की दाढ़ी में तिनका। यदि गठबंधन इतना ही फेविकोल के जोड़ टाइप अटूट था, तो उसे इतनी बार सफाई देने की क्या जरूरत थी?

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क्या साढ़े तीन महीने में बिहार के हर घर तक नल से पानी पहुंचा पाएंगे नीतीश कुमार?

अब भी बिहार के ऐसे 16 ज़िले हैं जहां पानी की उपलब्धता का आंकड़ा 50 प्रतिशत से नीचे है। इनमें 6 ज़िले ऐसे हैं जहां ये आंकड़ा 40 प्रतिशत से नीचे है। चार ज़िले ऐसे हैं जहां ये आंकड़ा 30 प्रतिशत से नीचे है।

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