दो बरस बाद बेतलहेम में क्रिसमस : नया साल, नये सपने, उम्मीद और हौसले के नाम!

व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए शायद यह पहला नया बरस है और पहली क्रिसमस है जब मैं बहुत खुश हूँ। इसकी वजह है फ़लस्तीन से आया एक ईमेल जिसमें बेतेलहेम की एक दोस्त ने एक वीडियो भेजा है और साथ ही बताया है कि दो साल से ग़ज़ा में हो रहे नरसंहार के चलते बेतेलहेम में और सारे फ़लस्तीन में क्रिसमस नहीं मनाया गया था। इस बार बेतेलहेम में क्रिसमस ट्री सजाई गई और क्रिसमस मनायी गई।

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सभी धर्मों का उद्देश्य विश्व मानवता का कल्याण एवं आशा का संदेश देना है: लियोपोस्दो जिरोली

प्रो. रमेशचंद्र नेगी (केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षण संस्थान सारनाथ), भाई धर्मवीर सिंह (ग्रंथी गुरुद्वारा), प्रो. सुमन जैन बी.एच.यू. , डॉक्टर सुनीता चंद्रा (कुलसचिव, तिब्बती संस्थान सारनाथ), स्वामी विश्वआत्मानंद (अद्वैत आश्रम ), मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी (मुफ्ती– ए –बनारस), प्रो. विशंभरनाथ मिश्र (महंत संकटमोचन), आदि ने अपने विचारों द्वारा इस कार्यक्रम की सार्थकता और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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