छतरपुरः हिंदूवादी संगठन ने इप्टा के नाट्य मंचन पर रोक के लिए लिखा धमकीभरा पत्र


छतरपुर। जिले में 26 फरवरी से किशोर सागर के निकट ऑडिटोरियम हॉल में नाट्य मंचन हो रहा है, जिसे देश की जानी-मानी नाट्य संस्था इप्टा द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान होने वाले नाट्य मंचन पर रोक के लिए विश्व हिन्दू परिषद की छतरपुर इकाई ने प्रशासन को चिट्ठी लिखी है।

विहिप का आरोप है कि इप्टा द्वारा मंचित किए जाने वाले ये नाटक पूर्णतया हिन्दू संस्कृति व धर्म विरोधी हैं। संगठन ने इस कारण ही प्रशासन से इनके मंचन पर जल्द से जल्द रोक लगाने की मांग की है।

छतरपुर के अनुविभागीय दंडाधिकारी को लिखे गए पत्र में विहिप के जिला सहसंयोजक सुरेंद्र शिवहरे ने कहा है कि-

छतरपुर में इप्टा नामक संगठन 26 फरवरी से किशोर सागर के निकट ऑडिटोरियम हॉल में नाट्य मंचन के माध्यम से जो कार्यक्रम करने वाले हैं वह पूर्णतया हिंदू संस्कृति एवं धर्म विरोधी हैं। इसलिए उन पर अति शीघ्र रोक लगाने की कृपा की जाए ताकि जन भावनाओं की कदर की जा सके।

letter-vhp
विहिप द्वारा प्रशासन को लिखा गया पत्र।

साथ ही कहा है कि इप्टा द्वारा छतरपुर जिले में देश व धर्म विरोधी कार्यक्रमों का शंखनाद किया जा रहा है जिससे पूरे समाज में धर्म विरोधी गतिविधियां बढ़ने लगेंगी।

इतना ही नहीं इप्टा दवारा जाति ही पूछो साधु की एवं बेशर्म मेव जयते जैसे कई आपत्तिजनक एवं संस्कृति विरोधी नाटक करने की शुरुआत की योजना बनाई जा चुकी है जिससे सभी संस्कृति प्रेमियों एवं धर्म प्रेमियों में आक्रोश उत्पन्न हो चुका है।

उन्होंने आगे लिखा है कि अति शीघ्र ऐसे धर्म विरोधी कार्यक्रमों में रोक लगाई जाए एवं साथ ही सरकारी भवन ऑडिटोरियम में कार्यक्रम के लिए दी हुई अनुमति भी निरस्त की जाए। अन्यथा बजरंग दल छतरपुर व्यापक स्तर पर विरोध एवं उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा जिसकी संपूर्ण जवाबदेही प्रशासन की होगी।

Shankhanaad
इप्टा द्वारा हो रहे नाट्य मंचन कार्यक्रम का पोस्टर।

देशगाँव से साभार प्रकाशित


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →