जाहिल इज़रायल विरोधियों को नहीं दिखता ईरान का फासीवाद : विष्णु खरे
रविवार की सुबह एक अप्रत्याशित चिट्ठी मेलबॉक्स में आई। भेजने वाले का नाम विष्णु खरे और संदर्भ गुंटर ग्रास की मेरी अनूदित कविता को देख कर पहले तो लगा कि …
Read MoreJunputh
रविवार की सुबह एक अप्रत्याशित चिट्ठी मेलबॉक्स में आई। भेजने वाले का नाम विष्णु खरे और संदर्भ गुंटर ग्रास की मेरी अनूदित कविता को देख कर पहले तो लगा कि …
Read Moreएक ऐसे वक्त में जब साहित्य और राजनीति की दूरी बढ़ती जा रही हो, जब लेखक-कवि लगातार सुविधापसंद खोल में सिमटता जा रहा हो, एक कविता के बदले जर्मन कवि …
Read Moreजितेन्द्र कुमार सचिन तेंदुलकर ने 25 मार्च को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी इच्छा जाहिर की कि वह अगले विश्व कप (2015) में भारत का प्रतिनिधित्व करना …
Read Moreप्रस्तुत लेख मैंने तीसरी दुनिया के अप्रैल अंक के लिए लिखा था। अब वह प्रकाशित हो चुका है, इसलिए पूरा लेख जनपथ पर डाल रहा हूं। यह लेख उत्तर प्रदेश …
Read Moreपिछले साल की 14 फरवरी याद है आपको? एक बड़ी अजीब घटना हुई थी उस दिन। सुबह से ही ट्विटर और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों समेत एसएमएस से हमें याद …
Read Moreकहां तो तय था चराग़ां हरेक घर के लिए कहां चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए… बिनायक सेन के खिलाफ़ राजद्रोह के मुकदमे पर सुनिए दानिश और फ़ारुकी की दास्तानग़ोई… …
Read Moreसमकालीन तीसरी दुनिया का मार्च अंक आ गया है। यह विश्व पुस्तक मेले में हॉल नंबर 11 के स्टॉल 133-134 पर भी उपलब्ध है। पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए …
Read Moreबुद्धिजीवियों की हालत बहुत दयनीय है। पूरी जि़ंदगी वे जनता के नाम की माला जपते हुए बिता देते हैं लेकिन जब कभी जनता के बीच जाते हैं तो जनता उन्हें …
Read Moreहिंदी की वैचारिक पत्रिका ‘समयांतर’ का फरवरी विशेषांक ‘विकास बनाम अस्तित्व’ निकालने की जि़म्मेदारी इस बार मुझे दी गई थी। अंक अब बाज़ार में आ चुका है और उसमें अतिथि …
Read Moreयह पलाश के फूलने का समय है रेत पर बने बच्चों के घरौन्दों से उठ रहा है धुआं हवाओं में घुल रहा है बारूद चट्टानों से रिसते पानी पर …
Read More