रायपुर के सैलानियों, विष्णु खरे का पत्र पढ़ो और डूब मरो!
(करीब चार दर्जन लाशों पर खड़े होकर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार साहित्य का महोत्सव मना रही है और हमेशा की तरह हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के कुछ चेहरे न सिर्फ …
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(करीब चार दर्जन लाशों पर खड़े होकर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार साहित्य का महोत्सव मना रही है और हमेशा की तरह हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के कुछ चेहरे न सिर्फ …
Read Moreपंकज मिश्रा वी एस नायपॉल ने 1976 में भारत को ‘एक घायल सभ्यता’ का नाम दिया था जिसकी जाहिर राजनीतिक व आर्थिक नाकामियों की तह में एक गहरा बौद्धिक संकट …
Read Moreहक़ीकत के आईने में फ़सानों का कारोबार पिछले साल दलित लेखक मुसाफिर बैठा ने फॉरवर्ड प्रेस पर यह आरोप लगाया था कि फॉरवर्ड प्रेस, फॉरवर्ड प्रेस नहीं है बल्कि वह …
Read Moreहक़ीकत के आईने में फ़सानों का कारोबार फॉरवर्ड प्रेस में नौकरी करते हुए ऐसे अनेक अवसर आए जब मैंने लिखने की कोशिश की और मुझे लिखने से वहां सीधे-सीधे या …
Read Moreहक़ीकत के आईने में फ़सानों का कारोबार फॉरवर्ड प्रेस में कर्मचारियों का शोषण होना और उन्हें बात-बात में अपमानित कर देना कोई नई बात नहीं है। पत्रिका का शायद ही …
Read Moreदिल्ली से निकलने वाली पत्रिका फॉरवर्ड प्रेस पर पिछले दिनों हुई पुलिस की कार्रवाई, कार्रवाई के पीछे पत्रिका के प्रबंधन द्वारा महिषासुर-विमर्श से जुड़े कंटेंट का दावा किया जाना और उस संदर्भ …
Read Moreपलाश विश्वास सवा बजे रात को आज मेरी नींद खुल गयी है। गोलू की भी नींद खुली देख, उसकी पीसी आन करवा ली और फिर अपनी रामकहानी चालू। जो मित्र …
Read Moreअभिषेक श्रीवास्तव आज से कोई साढ़े आठ साल पहले यानी 2006 के फरवरी में ”सीनियर इंडिया” नाम की एक व्यावसायिक पाक्षिक पत्रिका के दफ्तर पर छापा पड़ा था। उसका विवादास्पद …
Read Moreबहसें पुरानी पड़ सकती हैं, लेकिन नए संदर्भ नित नए सिरे से बहस किए जाने की ज़रूरत को अवश्य पैदा कर सकते हैं। मसलन, कुछ लोगों की इधर बीच की …
Read Moreव्यालोक हैदर नाम की इस फिल्म को अगर आप कश्मीर-समस्या के बरक्स देखेंगे, तो कई तरह की गलतफहमी पैदा होने के अंदेशे हैं। यह मुख्यतः और मूलतः एक व्यक्तिगत बदले …
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