तालिबान के गढ़ में मलाला की आवाज़


तालिबान की ज्यादतियों के खिलाफ पिछले तीन वर्षों से बेख़ौफ़ आवाज़ बुलंद करने वाली 14 वर्षीय मलाला यूसुफ्जई को एक तालिबानी आतंकवादी ने गोली मार दी और वह अभी भी ज़िंदगी और मौत से संघर्ष कर रही है. इस छोटी बच्ची ने ख़ास तौर पर लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगाने के तालिबानी फरमान के खिलाफ अभियान चलाया था. 
इस पूरे प्रकरण के बारे में हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचानी चाहिए. मलाला का 2012 के एक interview का लिंक नीचे है जो सुनने लायक है। 

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One Comment on “तालिबान के गढ़ में मलाला की आवाज़”

  1. शनदार इंटरव्यू है। कितनी मैच्योर और स्पष्ट। इंटरव्यू लेने वाली मोहतरमा एफएम अनाउंसर टाइप हैं फिर भी मलाला अपनी बातें कह गईं। इन्सानियत पर उनका जोर था, जुल्म के खिलाफ चुप न रहने पर था। उनके पिता को भी सलाम। उन्होंने कहा कि मलाला जैसी बहुत सी लड़कियां हैं, बस उनके वालदैन उन्हें इजाजत नहीं देते।

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