लाश के इंतज़ार में एक मज़ार: अरुंधति राय

अरुंधति राय  अफज़ल गुरु की सुनवाई पर दिसंबर 2006 में एक किताब आई थी ”13 दिसंबर- दि स्‍ट्रेंज केस ऑफ दि अटैक ऑन दि इंडियन पार्लियामेंट: ए रीडर”। इस पुस्‍तक …

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Mau Film Festival: शहादत को सिनेमा का सलाम

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इरोम शर्मिला पिछले 12 साल से भूख हड़ताल पर है। शर्मिला मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) को हटाने की मांग को …

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WHY SOCIALISM???

Albert Einstein is the world-famous physicist. This article was originally published in the first issue of Monthly Review (May 1949). Just to remember him on his b’day today, we should …

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Sunday Review SBGR: ”अब हम खड़े हो गए हैं, तो और झेलाएंगे”

यू टू ब्रूटस… व्‍यालोक  “साहब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स” देखने के बाद निष्कर्ष के तौर पर दो-तीन बातें बिल्कुल साफ समझ में आती हैं। पहली, तो सामान्यीकरण का खतरा उठाते …

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राजेश की महानता का मैं आभारी हूं: रणधीर कुमार

रंग निर्देशक रणधीर कुमार  राजेश चन्द्र ने बहुत गहरे आरोप मुझ पर बड़े ही विस्तार से लगाए हैं। मैंने अपने स्तर पर कुछ स्पष्टीकरण देने की कोशिश की थी लेकिन मुझे …

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यह सफलता का नहीं गटर का रास्ता है साथी!

कुछ दिनों पहले ”समकालीन रंगमंच” नामक नई पत्रिका के पहले अंक के एनएसडी, दिल्‍ली में लोकार्पण पर हुए विवाद के संदर्भ में इसके संपादक रंगकर्मी राजेश चंद्र की ओर से …

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निजामुद्दीन: देवी प्रसाद मिश्र की कविता

देवी प्रसाद मिश्र देवी प्रसाद मिश्र हिंदी के अपने किस्‍म के एक कवि हैं जो आम तौर से हिंदी जगत की हलचलों और आयोजनों में कम दिखते/पाए जाते हैं। पिछली …

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