पूर्वांचल में आंदोलन की तैयारी शुरू, मार्च में होगी क्षेत्रीय किसान महापंचायत, इतवार से गांव-गांव अभियान


संयुक्त किसान मोर्चा की दो दिवसीय बैठक गाजीपुर के नंदगंज में 18 फरवरी 2021 को कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के डॉ. परमानंद यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

बैठक में तीन किसान विरोधी कानून वापस करने तथा समर्थन मूल्य पर खरीदी के गारंटी के कानून बनाये जाने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किये जा रहे आंदोलन पर चर्चा उपरांत इस किसान आंदोलन को पूर्वाचल में आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।

इस बैठक में निम्न निर्णय लिए गए-

  • आगामी मार्च के तीसरे सप्ताह में पूर्वाचल में क्षेत्रीय स्तर की किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा।
  • 21 फरवरी से गाजीपुर, बलिया, मऊ, बनारस के गांव-गांव में किसान बैठकों के माध्यम से किसान महापंचायत और किसान आंदोलन की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
  • 6 मार्च को पूर्वाञ्चल संयुक्त किसान मोर्चा के गठन वास्ते विभिन्न किसान संगठन एवं नागरिक संगठनों की बैठक का आयोजन किया जाएगा।

इस बैठक में विभिन्न किसान संगठनों के नेतृत्वकारी साथी उपस्थित रहे जिसमें प्रमुख रूप से कृषि भूमि बचाओ मोर्चा से अमरनाथ यादव, रामाश्रय यादव, राघवेंद्र, जोखन यादव, कुसुम तिवारी, जय शंकर। स्वराज इंडिया से बलवंत यादव, रिहाई मंच से राजीव यादव और शाह आलम, हरियाणा से परमाणु विरोधी मोर्चा से राजेन्द्र शर्मा, जनसंघर्ष समन्वय समिति से राजेन्द्र मिश्रा, बिहान से रविन्द्र, झारखंड से गांव गणराज्य के कुमारचंद मार्डी, किसान सभा से बचेलाल यादव, बेच्यु केशव आदि प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →