पंजाबी प्रेस क्लब ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया (पीपीसीबीसी) के सदस्यों ने पत्रकार और लेखक गौतम नवलखा को अमानवीय स्थितियों में भारत की जेल में कैद रखे जाने की एक स्वर में निदा की है।
गौतम नवलखा को अप्रैल 2020 में फर्जी आरोपों में गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल मुंबई की एक जेल में है। उनका इकलौता अपराध ये है कि उन्होंने ताकतवर लोगों से सवाल किया और हमेशा अल्पसंख्यकों और शोषितों के हक में खड़े रहे। 1984 के सिख नरसंहार पर पहली प्रामाणिक रिपोर्ट ”हू आर दि गिल्टी” के प्रकाशन में नवलखा की अहम भूमिका थी। इस रिपोर्ट ने दिखाया था कि कैसे मानवता के खिलाफ बर्बरतम अपराधों में से एक में भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान की मिलीभगत रही है।
आज स्वास्थ्य चिंताओं और जेलों में महामारी के खतरे के बावजूद उन्हें मानवीय आधार पर रिहा नहीं किया जा रहा है।

मंगलवार 9 नवंबर को पीपीसीबीसी ने सर्रे में आयोजित अपनी मासिक बैठक में एक संकल्प पारित करते हुए नवलखा को तुरंत रिहा करने की मांग की और उनके साथ एकजुटता दर्शायी।
संयोग से नवंबर के पहले हफ्ते में ही 1984 के सिख विरोधी राज्य प्रायोजित दंगे की 37वीं बरसी गुजरी है। नवलखा न्यूजक्लिक और इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के लिए लिखते थे और पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) से जुड़े हुए थे जिसने पीयूसीएल के साथ मिलकर सिख नरसंहार पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
बीते 31 अक्टूबर को वैंकूवर स्थित रेडिकल देसी ने सर्रे में भारतीय वीज़ा और पासपोर्ट आवेदन कार्यालय के बाहर एक रैली आयोजित कर के नवलखा को कैद रखे जाने का विरोध किया था।


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