मध्य प्रदेश में फैलते सांप्रदायिक तनाव पर लेखक संगठनों और लेखकों का राष्ट्रपति को पत्र


प्रति,
राष्ट्रपति महोदय, 
राष्ट्रपति भवन, 
नई दिल्ली

हम मध्यप्रदेश के नागरिक प्रदेश की विशेष परिस्थितियों की ओर आपका ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और आपके हस्तक्षेप का अनुरोध कर रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इस समय प्रदेश में फुल टाईम राज्यपाल नहीं है। वैसे भी पिछले वर्षों में कई बार ऐसा हुआ है जब प्रदेश में फुल टाईम राज्यपाल नहीं रहे हैं। आपको ज्ञापन देने का एक कारण यह भी है कि देश के अन्य भागों में भी मध्यप्रदेश जैसी ही परिस्थितियां हैं ।

जैसा कि आपको ज्ञात होगा कि मध्यप्रदेश में अध्यादेश के माध्यम से तथाकथित लव जिहाद पर नियंत्रण करने का प्रयास किया गया है। इस बारे में हम अधोहस्ताक्षरकर्ताओं की राय है कि जहां तक विवाह का संबंध है, प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को इस संबंध में स्वयं निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। हमारे संविधान में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान हैं। अभी हाल में अनेक राज्यों के उच्च न्यायालयों ने भी यही स्पष्ट राय प्रकट की है। इस अध्यादेश के द्वारा नागरिकों के इस अधिकार में हस्तक्षेप किया गया है। इस तरह यह अध्यादेश पूरी तरह से संविधान विरोधी है।

हमें इस बात पर भी आपत्ति है कि दूरगामी परिणाम वाले इस कानून को अध्यादेश के माध्यम से लागू किया गया है। संविधान में सरकारों को अध्यादेश के माध्यम से कानून बनाने का अधिकार दिया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति का मुकाबला अध्यादेश के माध्यम से अधिकार प्राप्त कर किया जा सके, विशेषकर ऐसी परिस्थिति में जब संसद या विधानसभा का सत्र न चल रहा हो और आपातकालीन स्थिति के कारण सदन का सत्र प्रारंभ होने का इंतजार करने का विकल्प उपलब्ध न हो।

अतः हमारा अनुरोध है कि इन अध्यादेशों का उपयोग स्थगित कर दिया जाए विशेषकर उस स्थिति में जब सर्वोच्च न्यायालय विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों पर विचार करने वाला है। हम लोगों की राय है कि इन कानूनों से समाज में विद्वेष और पारस्परिक घृणा की स्थिति उत्पन्न होगी।

इसके अतिरिक्त अभी हाल में राज्य में ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे समाज में असुरक्षा की भावना फैली है। राज्य के तीन स्थानों पर कुछ हिन्दू संगठनों के समर्थकों तथा कुछ अल्पसंख्यकों के बीच सीधे टकराव की स्थिति निर्मित हुई। बताया गया कि कुछ अल्पसंख्यकों ने हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों पर पथराव किया। पुलिस ने यह आरोप तो लगाया परंतु यह नहीं बताया कि अल्पसंख्कों ने पथराव किस परिस्थिति में और किस कारण किया। यह भी बताया गया कि एक स्थान पर कुछ उपद्रवी तत्वों ने एक मस्जिद पर चढ़करभगवा झंडा फहराया। एक अन्य स्थान पर मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

हमें यह बताते हुए अफसोस हो रहा है कि उन लोगों के विरूद्ध तो कार्यवाही हुई जिन्होंने पत्थर फेंके थे परंतु जहां तक हमारी जानकारी है उन लोगों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई जिन्होंने भड़काऊ नारे लगाए और मुस्लिम धार्मिक स्थलों का अपमान किया। इस तरह वैमनस्य पैदा करने का प्रयास करने वाले इन तत्वों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुलिस की इस तरह की एकतरफा कार्यवाही से अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना एवं आक्रोश पैदा होता है।  

हम हैं निवेदक

राजेन्द्र शर्माएल. एस. हरदेनियाकुमार अंबुजरमाकांत श्रीवास्तवसुबोध श्रीवास्तवराकेश दीवानकुमुद सिंहजावेद अनीसउपासना बैहारआशा मिश्राशैलेन्द्र शैलीसत्यम पाण्डेरघुराज सिंहसाजिद अलीरामप्रकाश त्रिपाठीराजेन्द्र कोठारी, मनोज कुलकर्णी, एस. आर. आजाद, संध्या शैली, नीना शर्मा, अशफिया जमाल,फादर आनंद मुटुंगल आदि जो निम्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं: राष्ट्रीय सेक्युलर मंचप्रगतिशील लेखक संघसरोकारयुवा विचार मंच, जनवादी लेखक संघ, आल इंडिया पीपुल्स साईंस नेटवर्क आल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन, क्रिशियन एसोसिएशन

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