ओडिशा: कालाहांडी में जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन, ज्ञापन


प्रेस नोट
[पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबरटीज़ (पीयूसीएल)]
14.12.2025

वेदांता प्राइवेट लिमिटेड की बॉक्साइट माइनिंग परियोजना हेतु अनुसूची V के अंतर्गत आने वाली ज़मीन के गैर-कानूनी अधिग्रहण के खिलाफ उड़ीसा में ग्राम वासियों की गिरफ्तारी और उन्हें डराने-धमकाने के खिलाफ देश भर के वकीलों का विरोध प्रदर्शन।

उड़ीसा के वकीलों की अगुवाई में देश भर के 125 से ज़्यादा वकीलों, क़ानूनी मामलों के जानकार और क़ानून के छात्रों ने उड़ीसा के राज्यपाल और उड़ीसा पुलिस के DGP को लिखी एक याचिका पर दस्तखत किए, जिसमें उनसे दरख़वास्त की गई कि वे अनुसूची V के अंतर्गत आने वाली ज़मीनों, वहाँ के नागरिकों की रक्षा, भय के माहौल को नियंत्रित करने और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का तुरंत निर्वहन करें।


ओडिशा सरकार को PUCL का पत्र

15december-PUCL-Letter-to-Odisha-administration

तथ्यों का संक्षिप्त विवरण

वेदांता प्राइवेट लिमिटेड को अनुसूची V के अंतर्गत आने वाली ज़मीन उड़ीसा राज्य द्वारा रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों के सिजीमाली इलाके में बॉक्साइट माइनिंग के मकसद से लीज़ पर दी गई थी। हाल ही में, वन सलाहकार समिति (FAC) ने 02.12.2025 को संपन्न अपनी 12वीं कमेटी बैठक में उड़ीसा सरकार को वेदांता की सिजिमाली बॉक्साइट माइंस को स्टेज 1 क्लीयरेंस के लिए राज्य स्तर पर मंज़ूरी देने की सिफारिश की थी, ताकि कुल माइनिंग लीज़ क्षेत्र 1,548.786 हैक्टेयर में से 708.24 हैक्टेयर जंगल की वन भूमि का डायवर्जन (उद्योग के लिए उपयोग) किया जा सके।

बॉक्साइट माइनिंग परियोजना के लिए ज़मीन खरीदने की पूरी प्रक्रिया में कई दिक्कतें हैं। सबसे पहले, गाँव वालों से बिना किसी पूर्व मशविरे और सहमति के ज़मीन लीज़ पर दे दी गई। इसमें लगभग आधी ज़मीन जंगल और समुदाय प्रबंधित ज़मीन है, जो वन संरक्षण अधिनियम, 1980, उड़ीसा अनुसूचित क्षेत्र अचल संपत्ति हस्तांतरण विनियमन 1956, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996, वन अधिकार अधिनियम 2006, वगैरह के तहत आती है। कानूनों के मुताबिक, किसी भी हस्तांतरण से पहले इन ज़मीनों पर रहने वालों की जानकारी और सहमति लेना ज़रूरी है।

दूसरा, कंपनी और राज्य ने मिलीभगत करके हथियारबंद पुलिस और कंपनी कर्मचारियों की मौजूदगी में 10 नकली ग्राम सभाएँ आयोजित कीं, ताकि लोगों की ज़बरन सहमति ली जा सके। तीसरा, IDCO के नियंत्रण वाला एक लैंड बैंक बनाने हेतु भी ज़मीन का इस्तेमाल किया गया, ताकि उसे वेदांता को सौंपा जा सके। चौथा, ग्राम सभाओं से पहले एक बहुत ही अधूरी पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें बारह मासा बहने वाली नदियों और पानी के श्रोत को कम आँका गया, और जिस पर कई सार्वजनिक सुनवाई में एतराज़ जताया गया।

इसके अलावा, पिछले दो सालों (2023-25) से इन गाँवों में पुलिस और कंपनी के कर्मचारी लगातार मौजूद रहे हैं। इस बीच, ग्राम वासियों ने ज़मीन अधिग्रहण की गैर-कानूनी प्रक्रिया का विरोध करना शुरू कर दिया है। ये ज़मीनें और जंगल समुदाय की ज़मीनें हैं जिस पर इलाके के लोग पीढ़ियों से खेती करते और उसकी सुरक्षा करते आए हैं। उन्होंने नकली ग्राम सभाओं का कड़ा विरोध किया, और सितंबर 2024 में अपनी ग्राम सभाएँ कीं, जिसमें उन्होंने वेदांता के बॉक्साइट माइनिंग प्रस्ताव को अपनी ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी, और इलाके की पारिस्थितिकी के लिए नुकसानदायक बताते हुए खारिज कर दिया।

विरोध प्रदर्शनों के जवाब में, विगत दो सालों से स्थानीय पुलिस द्वारा डराने-धमकाने, परेशान करने, हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने की एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दिया गया। इससे दोनों ज़िलों में डर का माहौल बना है और कानून-व्यवस्था समाप्त हो गई है। लोग अस्पताल या हाट जाते समय भी डरे रहते हैं कि कहीं उन्हें अचानक गिरफ्तार न कर लिया जाए। रोज़मर्रा की ज़िंदगी लगभग नामुमकिन हो गई है। पुलिस को आम लोगों को अगवा करते देखा गया है, और गिरफ्तार लोगों का कहना है कि अगर उन्होंने वेदांता के बॉक्साइट माइनिंग परियोजना का विरोध किया तो उन्हें धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा। गाँवों के नौ से ज़्यादा नेता अभी भी हिरासत में है। आम लोगों को धमकाने का काम भी बदस्तूर जारी है।

समुदाय की माँगें

1.⁠ ⁠वेदांता को दी गई लीज़ की तुरंत समीक्षा की जाए।
2.⁠ ⁠परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों की गिरफ्तारी बंद की जाए और उनके खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द किए जाएँ।
3.⁠ ⁠जब तक ग्राम सभाएँ बिना भय अपनी मर्ज़ी से फ़ैसले न ले लें, तब तक इलाके में ज़मीन अधिग्रहण समेत सभी काम रोके जाएँ।
4.⁠ ⁠किसी भी तरह की पुलिस तैनाती ग्राम सभाओं की मंज़ूरी पर निर्भर हो।
5.⁠ ⁠परेशान करने, हिरासत में लेने और गिरफ़्तारी के लिए ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों की जाँच हो।
6.⁠ ⁠गाँवों में कंपनी के कर्मचारियों की मौजूदगी पर रोक लगाई जाए।

ज़्यादा जानकारी के लिए :

ऐश्वर्या रविकुमार – 9900047744
नरेंद्र मोहंती – 9437426647


About जनपथ

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