दुनिया को चाहिए अमन लेकिन मुनाफाखोरों को जंग चाहिए: विनीत तिवारी


“ज़ाहिर है जंग वे चाहते हैं जिन्हें जंग से सीधे या अप्रत्यक्ष तरह से फ़ायदा हो। मोटे तौर पर जंग उन्हें चाहिए जो अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहते हैं, दूसरों के जीवन पर, उनकी मेहनत पर, उनके संसाधनों पर, उनकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं। उसके बाद जंग उन्हें चाहिए जिनका जंग से कारोबार चमकता है, जैसे हथियार बनाने वाली कम्पनियाँ और युद्ध में काम आने वाली चीजों की आपूर्ति करने वाली कंपनियां। इसके अलावा जंग उन्हें भी चाहिए होती है जो अपने देश की असन्तुष्ट जनता का ध्यान ज़िंदगी के असली मसलों से भटकाकर झूठी देशभक्ति में उलझाना चाहते हैं ताकि जनता अपने शासकों से सवाल न पूछे।”

वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड रमेश मिश्रा के पंचम स्मृति दिवस पर 17 जून 2025 को आगरा में व्याख्यान देते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव, कवि और संपादक विनीत तिवारी ने यह विचार व्यक्त किये। गोष्ठी का विषय था, “दुनिया को चाहिए अमन तो जंग किसे चाहिए: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव”। 

उत्तर प्रदेश में वामपंथी आंदोलन की जड़ें मजबूत करने वाले कॉमरेड रमेश मिश्रा का पाँचवाँ स्मृति दिवस यूथ हॉस्टल, संजय प्लेस, आगरा में मनाया गया। अतिथियों ने का. रमेश मिश्रा जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि दी। इप्टा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव दिलीप रघुवंशी ने कामरेड मिश्रा का परिचय पढ़ा। नीरज मिश्रा ने आए हुए अतिथियों का माला पहनकर स्वागत किया। मुख्य वक्ता विनीत तिवारी ने दुनिया भर में चल रहे युद्धों के साथ-साथ अमेरिकी वर्चस्व में आ रही गिरावट को भी रेखांकित किया।



उन्होंने कहा, “हमें आज दुनिया भर में युद्ध विरोधी आंदोलन को मजबूत करने की ज़रूरत है क्योंकि जंग से आम अवाम का कभी भला नहीं होता। युद्ध के वक़्त यह माहौल बनाया जाता है कि अपने देश के शासकों से सवाल न पूछे जाएँ क्योंकि अभी दुश्मन देश से मुक़ाबले के वक़्त है और ऐसे में हमें अपने शासकों से सवाल पूछकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। यह बिल्कुल ग़लत है। जागरूक और ज़िम्मेदार नागरिकों को ज़रूरी कर्तव्य की तरह शासकों से हमेशा सवाल पूछने चाहिए क्योंकि ऐसी आपात स्थितियों का फ़ायदा उठाकर और भय दिखाकर सरकारें जनविरोधी क़दम उठाती हैं।”

उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देश मिलकर ब्रिक्स में जो व्यापारिक समझौते कर रहे हैं, उससे दुनिया के व्यापार पर से अमेरिकी पकड़ कमज़ोर हो रही है। फ़लस्तीन-इज़राएल और इज़राएल-ईरान तथा रूस-यूक्रेन युद्धों के पीछे असल वजह अपनी फौजी ताक़त से दुनिया को डराने की अमेरिकी कोशिश भी है। उन्होंने चीन के बेल्ट एण्ड रोड इनिश्यटिव पर भी इस संदर्भ में प्रकाश डाला। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉमरेड एन एस श्रीवास्तव ने कहा, “हम मूल रूप से शांतिप्रिय देश हैं और हम शांति और सद्भाव को मानने वाले हैं।” राज्य परिषद के सदस्य कॉमरेड प्रकाश प्रधान, जिला मंत्री कॉमरेड पूरन सिंह, डॉक्टर जे एन टंडन ने अपने विचार व्यक्त किए। कॉमरेड रमेश मिश्रा को याद करते हुए परमानंद शर्मा, इप्टा आगरा के संगीत निर्देशन में नाट्य पितामह राजेंद्र रघुवंशी रचित गीत “लाल किरण धरती पर उतरी,अब वह पूर्ण प्रकाश है” एवं कवि गोपाल दास नीरज का गीत “इसीलिए तो नगर-नगर बदनाम हो गए मेरे आंसू” सूर्यदेव और मुक्ति किंकर ने तथा कॉमरेड रमेश मिश्रा के जीवन पर आधारित एक अन्य गीत श्री भगवान स्वरूप “योगेंद्र” ने प्रस्तुत करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। ढोलक पर संगत संजय कुमार ने की।

इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे कॉमरेड सरला जैन, डॉक्टर ज्योत्स्ना रघुवंशी, डॉक्टर पी एस कुशवाह, मोहन सिंह, भारत सिंह, रामनाथ शर्मा, प्रियंका मिश्र, एस के खोसला, बृजेश वाष्णेय, ताराचंद, हरी बाबू, दिनेश पालीवाल, प्रेम कुमार शर्मा। कार्यक्रम का संचालन दिलीप रघुवंशी का रहा तथा कॉमरेड धर्मजीत ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। 


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