इंडिया टुडे, Times Now और News18 पर कार्रवाई के लिए दिशा रवि ने लगाई दिल्ली HC में याचिका


ग्रेटा थुनबर्ग ‘टूलकिट’ केस में बंगलुरु से दिल्‍ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गयीं पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि ने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने मीडिया ट्रायल के खिलाफ याचिका लगाते हुए इंडिया टुडे और टाइम्‍स नाउ के ऊपर कार्रवाई करने की मांग की है।

दिशा रवि ने दिल्‍ली हाइकोर्ट में एक याचिका में मांग की है कि दिल्‍ली सरकार और दिल्‍ली पुलिस को निर्देश दिया जाय कि वे टूलकिट एफआइआर के सम्‍बंध में सूचनाओं को लीक न करें क्‍योंकि मीडिया पूर्वाग्रहग्रस्‍त तरीके से उनके खिलाफ ट्रायल चला रहा है।

उन्‍होंने खास तौर से न्‍यूज़ 18, इंडिया टुडे ग्रुप और टाइम्‍स नाउ का नाम लिया है। उनका कहना है कि दिल्‍ली पुलिस की पूर्वाग्रहग्रस्‍त प्रेस ब्रीफिंग और लीक की गयी सामग्री के आधार पर ये मीडिया प्रतिष्‍ठान उनके ऊपर हमला कर रहे हैं।

उन्‍होंने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी गिरफ्तारी निराधार और अवैध है। पुलिस ने बिना ट्रांजिट रिमांड के उन्‍हें बंगलुरु से दिल्‍ली लाकर गिरफ्तार किया, यह उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

दिशा ने याचिका में मांग की है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय टाइम्‍स नाउ, इंडिया टुडे और न्‍यूज 18 सहित अन्‍य सैटेलाइट चैनलों के खिलाफ उपयुक्‍त कार्रवाई करे जो इस तरीके से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जिससे उनके निजता के अधिकार, प्रतिष्‍ठा के अधिकार, निष्‍पक्ष न्‍याय और सुनवाई के अधिकार का हनन हो रहा है, जो संविधान के अनुच्‍छेद 21 के अंतर्गत उन्‍हें प्राप्‍त है।


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

View all posts by जनपथ →