असंभव संवाद
पार्ट-1 आपको जीने के लिए क्या चाहिए? खुशी। और खुश रहने के लिए? ढेर सारा पैसा…। चलिए, पद और नाम भी… जोड़े देते हैं। अब क्या बचा? कुछ नहीं…। …
Read MoreJunputh
पार्ट-1 आपको जीने के लिए क्या चाहिए? खुशी। और खुश रहने के लिए? ढेर सारा पैसा…। चलिए, पद और नाम भी… जोड़े देते हैं। अब क्या बचा? कुछ नहीं…। …
Read MoreList of sponsors Incest is a reality but perhaps all civilizations have been wary of it. Jaipur Literature Festival that began as ‘civil society’ initiative in 2006 has developed …
Read Moreनेपाल की माओवादी पार्टी सीपीएन(एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य और नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री बाबूराम भट्टराई ने भारत की अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान भारत-नेपाल जन एकता …
Read Moreअसाध्य वीणा भाग-2 यह कठिन समय की अभिव्यक्ति है। समय से भी कठिन- कठिनतर। जो काफी जोर लगाने पर आती भी है, तो जाती बिखर- समय में दम तोड़ती पसलियों …
Read Moreचश्मा ऐसा हो कि दुनिया वैसी ही दिखे जैसी है Read more
Read Moreक्या ग़ालिब और कार्ल मार्क्स एक-दूसरे को जानते थे। अब तक तो सुनने में नहीं आया था। लेकिन सच यह है कि दोनों एक-दूसरे को जानते ही नहीं थे, बल्कि …
Read Moreगलतियां सभी से होती हैं। लेकिन ऐतिहासिक गलतियां कुछ ही करते हैं। जैसे सीपीएम ने ऐतिहासिक गलती की थी। उसने माना भी, कि सरकार को बाहर से समर्थन देना कितना …
Read Moreमार्च में पिछली पोस्ट से लेकर अब तक जनपथ सूना पड़ा रहा। इसकी एक नहीं, कई वजहें गिनाई जा सकती हैं। बहरहाल, साल बीतने को है और पिछले नौ महीनों …
Read Moreपिछले करीब एक महीने से जनपथ सूना पड़ा है। अच्छा नहीं लगता, लेकिन वक्त का तकाजा है। लंबा लिखने का वक्त नहीं और वक्त है भी तो मौसम खराब। ऐसे …
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