याकूब मेमन: ”विस्‍थापित आक्रोश” का ताज़ा शिकार

आर. जगन्नाथन  1993 के मुंबई बम धमाकों में उसकी भूमिका के लिए याकूब मेमन को अगर फांसी पर चढ़ाया जाता है, तो यह एक बहुत भारी नाइंसाफी होगी और इससे …

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नेपाल में गायः पवित्र जीव से राष्ट्रीय पशु तक

विष्‍णु शर्मा का यह लेख दो दिन पहले जब हमें प्राप्‍त हुआ, उस वक्‍त तक नेपाल के संविधान में ”धर्मनिरपेक्ष” शब्‍द पर कोई बहस प्रत्‍यक्ष नहीं थी, लेकिन 28 जुलाई …

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गौमांस पर प्रतिबंध और मौलिक अधिकारों का हनन – कुछ आयाम

पीपल्स यूनियन फॉर डैमोक्रैटिक राइट्स रिपोर्ट प्रकाशन – जुलाई 2015 गौमांस पर प्रतिबंध और मौलिक अधिकारों का हनन – कुछ आयाम भारतीय जनता पार्टी सरकार ने अपने 2014 के चुनाव …

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Banned and Damned: SIMI’s Saga with UAPA Tribunals

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (रिपोर्ट प्रकाशन)                                                                                                                          8 जुलाई 2015 2001 से स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) के तहत एक प्रतिबंधित संगठन है …

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इमरजेंसी का स्‍मरण और गांधी के बाएं बाजू बंधा बैनर

अभिषेक श्रीवास्‍तव ‘‘आपातकाल की चालीसवीं बरसी पर रिहाई मंच ने दिया धरना… जलाकर मारे गए शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को इंसाफ दिलाने और प्रदेश में दलितों, महिलाओं, आरटीआइ कार्यकर्ताओं …

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प्रफुल भाई, इन्‍हें माफ़ करना… ये खुद अपने दुश्‍मन हैं !

अभिषेक श्रीवास्‍तव  प्रफुल बिदवई: 1949 – 23 जून, 2015  इसे दुर्भाग्‍य कहूं या सौभाग्‍य कि प्रफुल बिदवई के गुज़रने की ख़बर मुझे राजदीप सरदेसाई की श्रद्धांजलि से मिली। बुधवार को …

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शाहजहांपुर, जून और विश्‍वासघात: 157 बरस पहले का एक पन्‍ना

पहली जंग-ए-आज़ादी के महानायक डंका शाह की भुला दी गयी शहादत शाह आलम  शाह आलम इतिहास की कब्र को खोदकर आज़ादी के वीर सपूतों की रूहों को आज़ाद कराने के …

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बीएचयू ब्रांड साम्‍प्रदायिक सौहार्द: स्‍वामी-खलकामी के बीच लटका जमात-ए-इस्‍लामी हिंद

 परसों मेल पर एक न्‍योता आया। भेजने वाले का नाम है तौसीफ़ मादिकेरी और परिचय है ‘राष्‍ट्रीय सचिव’, स्‍टू‍डेंट्स इस्‍लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया (एसआइओ)। कार्यक्रम बनारस हिंदू युनिवर्सिटी में दो …

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विकास की बलिवेदी पर: आखिरी किस्‍त

अर्धकुक्‍कुटीय न्‍याय की चौखट  इस कहानी को और लंबा होना था। कनहर की कहानी के भीतर कई ऐसी परतें हैं जिन्‍हें खोला जाना था। ऐसा लगता है कि उसका वक्‍त …

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