सितारों के बिना एक दुनिया : सीमा आज़ाद

(इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल में कैद होने के बावजूद सीमा आज़ाद ने एक पत्रकार का बुनियादी धर्म नहीं छोड़ा। यहां के बंदियों के बच्‍चे उन्‍हें सीमा दीदी कहते हैं। …

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नेपाल पर कुछ ज़रूरी सवाल: विष्‍णु शर्मा का पत्र

समकालीन तीसरी दुनिया के ताज़ा अंक में नेपाल पर लिखे संपादकीय और आवरण कथा पर विष्‍णु शर्मा का यह पत्र आज आया है। कायदे से यह पत्र तीसरी दुनिया के …

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बिहार में लगी आग, तो दिल्‍ली के संपादकों ने छोड़ा धुआं…

पिछले हफ्ते मुखिया की हत्‍या के बाद उधर बिहार जल रहा था, इधर राष्‍ट्रीय कहे जाने वाले अखबारों के संपादकों के पश्चिम से धुआं उठ रहा था। यह लेख दिल्‍ली …

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भूमिहारों का परचा और आइसा की स्‍याही: मुखिया के बहाने एक फ्लैशबैक

व्‍यालोक बिहार में ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या के बाद दो दिनों तक बिहार की पूरी व्यवस्था को कुछ ‘सौ’ गुंडों के हवाले कर तमाशबीन बने नेताओं और प्रशासकों की ज़रा …

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एक ‘ठहरी हुई विचारधारा’ से संवाद की इतनी उतावली क्‍यों राकेश जी?

हेडगेवार के जीवनीकार प्रो. राकेश सिन्‍हा के लेख का जवाब कवि-पत्रकार रंजीत वर्मा ने भेजा है। उन्‍होंने अपने जवाब में आवाजाही को लेकर फैले आग्रहों के पीछे की राजनीतिक साजि़श को पकड़ा …

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