आपसी मेलजोल व प्रेम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा: डॉ. आरिफ

प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि समाज में बहुमुखी विकास और खुशहाली के लिए आशा ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, संविधान और सौहार्द पर अपने प्रयास और सघन करेगी तथा हम सुदूर इलाकों में अपनी पहुँच बढाने की दिशा में काम करेंगे।

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रूस के राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध के खिलाफ बनारस से एक खुला पत्र

1987 में आयी एक पुस्‍तक ‘गांधी ऑन वॉर एंड पीस’ में लेखक कहते हैं कि ‘’गांधी की दृष्टि में जंग समकालीन जगत की सबसे महत्‍वपूर्ण समस्‍या है।‘’ गांधी ‘’सही’’ और ‘’गलत’’ युद्ध के बीच भेद नहीं करते थे- उनकी नजर में हर जंग खराब और अन्‍यायपूर्ण थी। उनका दृढ़ मत था कि ‘’कुछ भी स्‍थायी हासिल करने के लिए युद्ध नैतिक रूप से वैध साधन नहीं हो सकता।‘’

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बिहार: मुसहर समुदाय की महिलाओं के साथ कई स्तरों पर होती है हिंसा

मुसहरी बस्ती की महिलाएं कहती हैं कि उन्हें केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि जन्म से मानसिक हिंसा भी झेलनी पड़ती है। बचपन से उसे दहेज के लिए अपने बाप-दादा से गरीबी और लाचारी की व्यथा सुननी पड़ती है। उसे जन्म लेना उस समय पाप लगता है जब उसके परिवार से दहेज की मांग की जाती है।

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हल्द्वानी: बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा

बस्ती बचाओ संघर्ष समिति इस मामले में सामाजिक और न्यायालयी स्तर पर मामले को बस्तीवासियों के पक्ष में उठा रही थी। साफ है कि यह बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं को हैरान-परेशान करने के इरादे से की गयी कार्यवाही है।

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: जांच दल की रिपोर्ट आयी, CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में होगी अपील

उत्तराखंड महिला मंच की ओर से कार्यक्रम का संचालन करते हुए मल्लिका विर्दी ने कहा कि अंकिता भंडारी केस में न्याय मिलने जरूरी है क्योंकि एक 18 साल की युवती के सारे जीवन की उम्मीदों पर कुठाराघात करते हुए उसे समाप्त कर दिया गया। सभी की नजर इस केस पर है। इसीलिए हम दिल्ली में आवाज उठाने आए हैं।

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बेरोजगारी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के लिए कई युवा संगठन आए साथ

किसी राजनीतिक दल के पास भी रोजगार के सवाल पर सुस्पष्ट विचार नहीं है। समय – समय पर छात्रों का आंदोलन भी उभरता है। अग्निवीर के विरुद्ध आंदोलन इसका प्रमाण है। स्थानीय स्तर पर भी आंदोलन चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में जितने भी आंदोलन हैं उनको राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित करने की जरूरत को देखते हुए कोआर्डिनेशन टीम का गठन किया गया।

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गांव छोड़ब नहीं: उड़ीसा के विस्थापन-विरोधी जन आंदोलनों की गाथाएँ

प्रस्तुत पुस्तक मूलत: पालग्रेव मैकमिलन और आकार बुक्स (2020) से प्रकाशित अंग्रेज़ी भाषा में छपी “रसिस्टिंग डिस्पोज़ेशन — द ओडिशा स्टोरी” का हिंदी अनुवाद है। हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा सेंटर फ़ॉर ह्यूमन साइंसेस, भुवनेश्वर द्वारा प्रकाशित (2020) “गां छाड़िबु नहीं” शीर्षक से यह पुस्तक, उड़िया भाषा में भी उपलब्ध है।

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बेदखली का गणतंत्र: G-20 के लिए सुन्दरीकरण के नाम पर उजाड़ी जा रही दिल्ली

महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क को संरक्षित करने के नाम पर दशकों से रह रहे निवासियों को बेदखल किया जा रहा है। लोगों को लंबे और महँगे क़ानूनी दाव-पेंच मे फंसाकर रखना एक पुरानी चाल है। इसी तरह तुग़लकाबाद के निवासियों को एएसआइ द्वारा मिला नोटिस लोगों की नींद उड़ा रहा है।

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हमारी नदियों को बचाने के लिए -20 डिग्री में उपवास कर रहे सोनम वांगचुक ‘नजरबंद’ हैं!

उन्होंने 26 जनवरी से पांच दिन के लिए दुनिया की सबसे ऊंची सड़क 18 हजार फुट पर स्थित खारदुंगला में -40 डिग्री के तापमान में अनशन शुरू करने का ऐलान किया था मगर खराब मौसम और स्थानीय प्रशासन की मनाही के चलते उनका ऐसा करना संभव नहीं हो पाया।

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जोशीमठ के आईने में हिमाचल का दर्दनाक भविष्य और विदेशी वित्तीय पूंजी का तांडव

हिमाचल के अंदर 2019 में हुई इनवेस्टर मीट के तहत जो 95 हजार करोड़ के मेमरोंडम ऑफ अंडरस्टेंडिग (एमओयू) हुए हैं अगर यह लागू हो जाए तो कितने जंगल का नाश होगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इतना ही नहीं सरकार हाईड्रो प्रोजेक्ट, मंडी के बल्ह, नांज, तत्तापानी जैसे इलाकों की उपजाऊ भूमि को भी बड़ी परियोजानाओं के लिए दे रही है।

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