लखीमपुर खीरी: AIPF की टीम का दौरा, जांच रिपोर्ट में मंत्री के इस्तीफे की मांग

किसानों को न्याय मिले इसके लिए आइपीएफ प्रदेश के न्याय पसंद लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करने वाले उन सभी लोगों को जो इस घटना से आहत है एक मंच बनाने के लिए शीध्र ही लखनऊ में बैठक बुलाएगा। आइपीएफ की तरफ से सीतापुर और दुद्धी में अनिश्चितकालीन घरना दिया जाएगा।

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स्वस्थ भोजन के बच्चों के अधिकार की रक्षा के लिए बनारस में उगा ‘पीपल’!

वाराणसी के संकट मोचन मंदिर के महंत और आईआईटी-बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को मोटापे और घातक बीमारियों की चपेट में आने से बचाने की तत्काल जरूरत है।

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‘अंतिका’ का पचपनिया विमर्श: ब्राह्मणों के हाथ से खिसक रही है मैथिली की सत्ता

ये सच है कि मैथिली भाषा पर जिनकी सत्ता है और इस भाषा के सरकारी और गैर सरकारी संस्थान पर जिनका वर्चस्व है वो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है। मगर जिस तेजी से मैथिली के सोशल डायनामिक्स का पहिया घूम रहा है तो वो दिन अब दूर नहीं जब मैथिली की सत्ता मैथिल ब्राह्मणों के हाथ से खिसक कर मैथिली भाषा के मूल हकदार बहुजन और दलितों के हाथ में चली जाएगी।

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लखीमपुर: किसानों और प्रशासन के बीच समझौता, मृतकों और घायलों को मिलेगा मुआवजा

विरोध कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच हुआ समझौता,जिससे शहीद किसानों के अंतिम संस्कार का मार्ग प्रशस्त हुआ – इस बीच, उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने विरोध कर रहे किसानों के बढते समर्थन को रोकने और दोषियों को बचाने के लिए कई अलोकतांत्रिक और सत्तावादी उपाय किए है – एसकेएम ने योगी सरकार की तानाशाहीपूर्ण कार्यवाहियों की कड़ी निंदा की

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किसानों के आह्वान पर ऐतिहासिक भारत बंद, तीन किसानों की मौत

किसान आंदोलन ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के 10 महीने पूरे किए, जहां भाजपा की निर्मम सरकार अतर्कसंगत और अनुत्तरदायी बनी हुई है- यह इस दिन था कि पिछले साल तीन किसान विरोधी, कॉर्पोरेट समर्थक कानूनों को राष्ट्रपति की सहमति दी गयी थी

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किसान आंदोलन के दस माह पूरे होने पर आज ऐतिहासिक भारत बंद

कई विपत्तियों और हमलों का सामना करते हुए किसानों के शांतिपूर्ण, दृढ़निश्चयी, आशावादी और धैर्यपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दस महीने पूरे हो गए! किसान आंदोलन में अब तक 605 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं!

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दिल्ली: अपनी मांगों को लेकर आशा कामगार यूनियन ने निकाला ‘आशा अधिकार मार्च’!

प्रदर्शन के उपरांत आशाओं का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव से मिला और आशा कर्मियों के तरफ से ज्ञापन भी सौंपा। आशाओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, 21000 रुपए प्रतिमाह वेतन लागू करने, 10,000 रुपए प्रतिमाह कोरोना भत्ता देने, सवेतन मातृत्व अवकाश जैसी कई मांगे उठाई। कोरोना के दौरान मारी गई आशाओं को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने और यूनियन बनाने के अधिकार पर हमले को रोकने आदि मुद्दों को लेकर भी विरोध दर्ज किया गया।

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जयपुर में हुआ किसान संसद का आयोजन, गुजरात से पहुंचा किसान दस्ता गाजीपुर!

अधिकांश कृषि घराने सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से अनजान थे, और एपीएमसी मंडियों में फसल बेचने में सक्षम नहीं होने के लिए बुनियादी ढांचे की कमी (यानी मंडियों या खरीदारों की अनुपलब्धता) को जिम्मेदार ठहराया — उल्लेखनीय यह है कि इन दो दौर के सर्वेक्षणों के बीच एमएसपी और मंडी प्रणाली की स्थिति खराब हो गई है। ये तथ्य कॉरपोरेट के पक्ष में सरकारी मंडियों के कमजोर किए जाने के बड़े आख्यान में फिट होते हैं, और तीन कृषि कानूनों के वास्तविक उद्देश्य को प्रत्यक्ष करते हैं।

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धार्मिक-कट्टरवादी सोच चाहे जिस रंग की हो उसकी मानसिकता एक ही होती है: जावेद अख्तर

मैं यहाँ अपनी बात को दोहरा रहा हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहता कि हिंदू दक्षिणपंथी लोग इस झूठ के परदे के पीछे छिपें कि मैं मुस्लिम संप्रदाय की दकियानूसी पिछड़ी प्रथाओं के विरोध में खड़ा नहीं होता।

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ग्लासगो क्लाइमेट समिट से पहले UNGA पर निगाह, जलवायु परिवर्तन पर सार्थक संवाद अपेक्षित

आज ग्लासगो क्लाइमेट समिट से बमुश्किल 50 दिन पहले संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली (यूएनजीए) का 76वां सत्र शुरू हुआ है। इस बैठक से तमाम उम्मीदें हैं, खास तौर से इसलिए क्योंकि इसमें होने वाली चर्चाएं और निर्णय वैश्विक जलवायु नीतियों की दशा और दिशा को बदल सकते हैं।

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