हिरासत में हुई मौतें: PVCHR के दखल पर झारखंड-ओडिशा की सरकारों को NHRC का नोटिस


राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ओडिशा में हिरासत में हुई एक मौत के प्रकरण में ओडिशा सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह मामला 8 अप्रैल, 2023 का है जब बौध के उपकारागार में आठ साल से कैद 30 वर्षीय एक न्‍यायिक बंदी रविंद्र मेहर ने खुदकशी कर ली थी।

यह नोटिस मानवाधिकार जन निगरानी समिति (पीवीसीएचआर) के डॉ. लेनिन रघुवंशी के मानवाधिकार आयोग में दिए गए आवेदन पर आया है। नोटिस में ओडिशा के मुख्‍य सचिव से पूछा गया है क्‍यों न मृत कैदी के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

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आयोग ने अपनी टिप्‍पणियों में स्‍पष्‍ट रूप से तीन बिंदुओं को उठाया है:

  1. हिरासत में कैद सभी व्‍यक्तियों की सुरक्षा और कल्‍याण की अंतिम जिम्‍मेदारी राज्‍य की है;
  2. हिरासत में हुई मौतें व्‍यवस्‍थागत उपेक्षा को दर्शाती हैं, खासकर तब जब मानसिक रूप से बीमार कैदियों को पर्याप्‍त निगरानी के बगैर रखा जाता है; और
  3. अधिकारियों द्वारा किए गए या न किए गए कृत्‍यों की पूर्ण जवाबदेही राज्‍य के ऊपर बनती है।

बीते 27 अगस्‍त को दिए अपने आदेश में आयोग ने ओडिशा के मुख्‍य सचिव को नोटिस भेजते हुए निम्‍न की तत्‍काल आवश्‍यकता पर जोर दिया:

  1. जेल अधिकारियों का मानवाधिकारों के प्रति संवेदीकरण;
  2. जेलों में निगरानी का इजाफा और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सहयोग; और
  3. हिरासत में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक व्‍यवस्‍थागत प्रणाली।     
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हिरासत में होने वाली मौतें वैश्विक स्‍तर पर मानवाधिकारों के लिए बड़ी चुनौती हैं जिनकी मुख्‍य वजह प्राय: उपेक्षा, जेलों में जरूरत से ज्‍यादा बंदियों की संख्‍या, खराब मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल और जवाबदेही का अभाव है। इस संदर्भ में मानवाधिकार आयोग का यह कदम अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार संस्‍थाओं के लिए एक नजीर है कि राज्‍यों को सबसे कमजोर की रक्षा करनी चाहिए, उपेक्षा नहीं।

यह आदेश बंदियों के साथ व्‍यवहार के संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा तय न्‍यूनतम नियम मानकों (नेल्‍सन मंडेला नियम) के अनुरूप है और भारत सरकार को उसकी संवैधानिक व अंतरराष्‍ट्रीय बाध्‍यताओं के तहत जिम्‍मेदार ठहराता है।

झारखंड से ऐसे ही एक अन्‍य मामले में मानवाधिकार जन निगरानी समिति के हस्‍तक्षेप पर मानवाधिकार आयोग का नोटिस और पांच लाख रुपये के मुआवजे का आदेश आया है। पीवीसीएचआर और पुलिस अधीक्षक, कोडरमा द्वारा मानवाधिकार आयोग में एक आवेदन भेजा गया था। मामला पीड़ित अर्जुन साव (55 वर्ष), पिता मंगरू साव, निवासी थाना डोमचांच, जिला कोडरमा का है जिसकी मृत्यु 13 अप्रैल 2022 को हुई थी। घटना अवैध माइका तस्करी से जुड़ी छापेमारी के दौरान की है।

ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने अर्जुन साव को हिरासत में लेकर लोहे की रॉड से हमला किया, बाद में उसका शव जंगल में मिला। परिजनों एवं ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। मृतक के बेटे की शिकायत पर एफआइआर संख्या 39/2022 (धारा 302/201/34 IPC) दर्ज हुई, जिसमें थाना प्रभारी सहित पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए। आरोपियों को निलंबित कर मामला एसआइटी जांच को सौंपा गया।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के निशान मिले, मृत्यु का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताया गया तथा विष की पुष्टि नहीं हुई। मजिस्ट्रेट जांच में सक्षम अधिकारी की अनुपस्थिति में छापेमारी एवं गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाई गईं।

इस मामले में आयोग की कार्यवाही हुई और उसने 25 अप्रैल 2022 को संज्ञान लेकर रिपोर्ट तलब की। 26 नवंबर 2024 की जांच रिपोर्ट में मृत्यु को संदिग्ध बताया गया और पुलिस की भूमिका संदिग्ध करार दी गई। इसके बाद आयोग के आदेश से राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया कि मृतक परिवार को पांच लाख रुपया मुआवजा क्‍यों न दिया जाए।


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