लद्दाख : जनता के अहिंसक आन्दोलन और लोकतांत्रिक मांगों के समर्थन व समाधान की राष्ट्रहित में अपील


हिमालय नीति अभियान की ओर से अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु और संयोजक गुमान सिंह लद्दाख में  पिछली पांच वर्षो से चल रहे अहिंसक आन्दोलन को आपसे समर्थन देने की अपील करते हैँl

इतने लम्बे दौर से शांतिपूर्ण आंदोलनरत जनता की उचित मांगों को पिछली कई सालों से लटकाए रखने तथा पिछले दिनों भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति के कारण रोष स्वरूप कुछ युवाओं द्वारा अप्रिय घटनाओं को अंजाम दिया गयाl हम सोनम वांगचुक द्वारा लद्दाख में हुई हिंसा रोकने की अपील की सराहना करते हुए युवाओं से वांगचुक की अपील पर ध्यान देकर आन्दोलन को शन्तिपूर्ण बनाए रखने की आशा व्यक्त करते हैl

स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार द्वारा इस बातचीत से हल होने वाले तार्किक मुद्दे को लापरवाही पूर्ण रवैये से बिगाड़ने के लिए निंदा करते हैँl सरकार का यह फर्ज है कि वह अहिंसक आन्दोलन को लटका कर हिंसक न बनने देl लद्दाख की जनता की लोकतान्त्रिक जन अपेक्षाओं को पूरा करने, क्षेत्र को संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने,  रोजगार और लद्दाख में जनप्रतिनिधि व्यवस्था बहाली के लिए जनता का यह आंदोलन न्यायोचित हैl आंदोलित लद्दाखवासियों ने अपनी मांगों को मनाने के लिए लद्दाख से दिल्ली तक सोनम वांगचुक के नेतृत्व में पिछले साल लगभग एक महीने तक पदयात्रा करके अपनी बात कहने का प्रयास कियाl अब मामले को लटका कर बार-बार आन्दोलन की जरूरत क्यों पड़ रही है?

जाहिर है सरकार लद्दाख की जनता से संवाद कायम करने में असफल रही है इसीलिए बार-बार फिर से जनता को आन्दोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा हैl सरकार द्वारा सोनम वांगचुक के खिलाफ सरकारी जांच एजेंसियों तथा उनके द्वारा संचालित विश्वविद्यालय को दी गई भूमि की वापसी की कार्यवाही निंदनीय हैl

हम मांग करते हैँ कि आन्दोलन की चारों मांगें ले दे कर सरकार तुरंत लद्दाख की संघर्षरत जनता से चर्चा कर के लद्दाख और देश हित में उचित समाधान तलाशेl आन्दोलन की मुख्य मांगें हैं कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएl संविधान की छठी अनुसूची में डाल कर संसाधनों पर स्थानीय निर्णायक भूमिका को मजबूत किया जाए, लोकसभा में दो सीटें दी जाएं, और नौकरियों में स्थानीय वासियों को प्राथमिकता दी जाएl ये सभी मांगें वाजिब हैंl

देशहित में केंद्र सरकार को इस सीमान्त क्षेत्र में लोगों के मन में यह भावना पैदा नहीं होने देनी चाहिए कि उनकी कोई सुनवाई नहीं करताl लद्दाख के लोग हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे हैंl उनके हाथ में प्रजातांत्रिक शक्ति आने से वे देश का भला ही करेंगेl गोलीबारी जैसी घटना की घोर निंदा करते हुए हम मांग करते हैँ कि शांति बहाली के लिए तत्काल शांति प्रयासों को सक्रिय किया जाए और लोगों की आवाज को सुना जाएl लोगों को स्थानीय संसाधनों के दोहन में अवैज्ञानिक तकनीकों और लालची प्रक्रियाओं से खतरा महसूस हो रहा हैl ज्यादातर सौर उर्जा और रेयर अर्थ खनिजों का दोहन बड़ी पूँजीपति कंपनियों के हाथ में जाने से अतिदोहन और स्थानीय नियंत्रण के अभाव में स्थानीय पर्यावरण और स्थानीय आर्थिक हितों को हानि पहुंचने का खतरा हैl इन मुद्दों पर साझी समझ बना कर लद्दाख और राष्ट्रहित में फैसले होने चाहिएl

लद्दाख के पर्यावरण या ग्लेशियरों की रक्षा की बात सबसे बड़ा राष्ट्रहित हैl जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जबकि पूरा पश्चिमी हिमालय प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ चुका है, लद्दाख की आवाज को गंभीरता से सुनने की जरूरत हैl दो विरोधी पड़ोसियों से घिरे इस संवेदनशील क्षेत्र के मुद्दों को हल करने में सरकार की लापरवाही देश पर भारी पड़ सकती हैl


कुलभूषण उपमन्यु, अध्यक्ष, हिमालय नीति अभियान
गुमान सिंह, संयोजक, हिमालय नीति अभियान


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जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

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5 Comments on “लद्दाख : जनता के अहिंसक आन्दोलन और लोकतांत्रिक मांगों के समर्थन व समाधान की राष्ट्रहित में अपील”

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