दिल्‍ली: फलस्तीन, ज़ायोनी-साम्राज्यवादी प्रभुत्व, और बदलती भू-राजनीति पर चर्चा

डॉ. क़मर आगा ने स्थिति की ऐतिहासिकता और अमेरिका और इज़राइल की विस्तारवादी नीति के षड्यंत्रों को ज़ाहिर किया। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी शक्ति के माध्यम से अमेरिका और इज़रायल दशकों से दूसरे देशों में हस्तक्षेप कर अपना विस्तार कर रहे हैं। ज़ायोनी शासन बाइबिल में उल्लेखित भू-भागों में बसने की अपनी ‘ग्रेटर इज़राइल’ योजना पर निर्माण का और उन इलाक़ों पर कब्ज़ा कर अपने में मिलाने का काम कर रहा है।

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जहां अस्तित्व ही प्रतिरोध है: प्रलेस के आयोजन में छलका फलस्तीन का दर्द

यह अवसर था प्रगतिशील लेखक संघ की भोपाल इकाई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम का जिसका शीर्षक था ‘जहां अस्तित्व ही प्रतिरोध है। कार्यक्रम के आरंभ में विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ कवि-कथाकार कुमार अम्बुज ने अपने विशिष्ट और नपेतुले अंदाज में बहुत सलीके से विषय को श्रोताओं के सामने खोला।

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ट्रंप का “शांति बोर्ड” फ़लस्तीनियों के ज़ख्मों पर नमक रगड़ने जैसा: IPSN

भारत-फ़लस्तीन एकजुटता नेटवर्क (आईपीएसएन) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फ़लस्तीन और ग़ाज़ा के लिए “बोर्ड ऑफ़ पीस” बनाने के उस प्रस्ताव की निंदा की है जिसमें पूरी बेशर्मी से ग़ाज़ा और फ़लस्तीन को धनकुबेरों के सामने नीलाम अथवा जिबह करने के लिए तश्तरी में परोस दिया गया लगता है।

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दो बरस बाद बेतलहेम में क्रिसमस : नया साल, नये सपने, उम्मीद और हौसले के नाम!

व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए शायद यह पहला नया बरस है और पहली क्रिसमस है जब मैं बहुत खुश हूँ। इसकी वजह है फ़लस्तीन से आया एक ईमेल जिसमें बेतेलहेम की एक दोस्त ने एक वीडियो भेजा है और साथ ही बताया है कि दो साल से ग़ज़ा में हो रहे नरसंहार के चलते बेतेलहेम में और सारे फ़लस्तीन में क्रिसमस नहीं मनाया गया था। इस बार बेतेलहेम में क्रिसमस ट्री सजाई गई और क्रिसमस मनायी गई।

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फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा: फ़लस्तीन यात्रा से लौटे विनीत तिवारी

फ़लिस्तीनियों को मानव अधिकारों से वंचित रखकर दुनिया भर से मौकापरस्त यहूदियों और अन्य धर्मों के लोगों को फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसाया गया है। इज़रायल में अमेरिकी समर्थन से ये लोग ऐश का जीवन जी रहे हैं। शेष आबादी, फ़लस्तीन के मूल निवासी, ईसाई और मुसलमान दोनों ही प्रताड़ित और अपमानित जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं।

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ग़सान कनाफ़ानी: फ़िलिस्तीन मुक्ति संघर्ष का राइटर और फाइटर

कनाफ़ानी ने जितना लिखा, उसका अभी तक कुछ अंश ही हासिल किया जा सका है। उन्होंने अनेक अखबारों में लिखा। अनेक नामों से लिखा। उनके लिए लेखन अपना नाम बनाने का नहीं, बल्कि फ़िलिस्तीन की आज़ादी के मक़सद को हासिल करने के लिए तर्क का औजार था, दुश्मन के ख़िलाफ़ मोर्चा था और लोगों को लामबंद करने की पुकार थी।

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इजरायली रंगभेद अफ्रीका से अधिक खतरनाक है: इरफान इंजीनियर

इजरायल फलस्‍तीन युद्ध 1948 से जारी है, जब यूरोपीय देशों ने इंग्लैंड के संरक्षण में इजरायल राष्ट्र की स्थापना की थी। सारी दुनिया से यहूदियों को बुलाकर फलस्‍तीन में बसाया गया और वहां के मूल निवासियों को अपना ही देश छोड़ने पर विवश किया गया।

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साहित्य में साम्राज्यवाद और विस्थापन की तलाश: संदर्भ इजरायल-फिलिस्तीन संकट

साम्राज्यवाद को दो पैमानों से पहचाना जा सकता है। पहला यह कि शोषक ताकतें किसी दूसरे देश पर कब्जा करके यानि उसे उपनिवेश बनाकर उस देश के उद्योगों को खत्म कर देती हैं और दूसरा उस देश की उपज और उत्पादन को जबरदस्ती हड़पती जाती हैं।

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इस्माइल शाम्मूत की पेंटिंग

इजराइल के ज़ुल्मों के खिलाफ फिलिस्तीन की खुशहाली के ख्वाब

प्रलेसं इकाई अध्यक्ष डॉ जाकिर हुसैन ने कहा कि इजरायल द्वारा बड़े पैमाने पर महिलाओं, बच्चों की हत्या की गई है। यूरोपीय देशों का दोगलापन सामने आया है। एक तरफ वे ग़जा में खैरात बांट रहे हैं दूसरी तरफ इजराइल को नित नए शास्त्र देकर फिलिस्तीनियों के कत्लेआम में मदद कर रहे हैं। भारत सदैव फिलिस्तीन की जनता के पक्ष में रहा है लेकिन वर्तमान सरकार इजराइल के साथ खड़ी है।

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