हर्फ़-ओ-हिकायत: पंजाब के नये मुख्यमंत्री क्या इतिहास को चुनौती दे रहे हैं?

पूरे देश में सबसे ज्यादा दलितों की आबादी पंजाब में ही है लेकिन विडंबना देखिए इन डेरों की वजह से बीएसपी या कोई और दलित पार्टी यहां कभी खड़ी नहीं हो सकी। दलित सिर्फ डेरा प्रमुख के आदेश पर वोट डालते रहे।

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तन मन जन: भारत में जनस्वास्थ्य और बच्चों की मौत

इसमें कोई शक नहीं कि विगत तीन दशकों में शिशु और मातृ मृत्यु दर में अपेक्षाकृत कमी आयी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता अब भी उतनी नहीं सुधर पायी है जितना दावा किया गया है। यह बात ध्यान देने की है कि नवजात शिशुओं के जीवन का पहला एक महीना माँ और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए देश की सेहत के लिए यह जरूरी है कि मातृ व शिशु स्वास्थ्य पर ईमानदारी से जिम्मेवारी तय कर ध्यान दिया जाए।

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बात बोलेगी: पालतू गर्वानुभूतियों के बीच खड़ी हिंदी की गाय

आप हिन्दी बरतते हैं क्योंकि आपको आसान लगता है। आप हिन्दी पढ़ते हैं, लिखते हैं, समझते हैं तो इसलिए क्योंकि उस भाषा में आप खुद को सहज पाते हैं और इसलिए भी कि वो आपके काम की ज़रूरत है और इसलिए भी कि क्योंकि उसमें आपको काम करने को कहा गया है। तब दुनिया में ऐसी कौन सी भाषा है जो इन तीनों में परिस्थितियों में ही बरती न जाती हो?

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हर्फ़-ओ-हिकायत: हिन्दी दिवस पर सितारा-ए-हिन्द राजा शिवप्रसाद की याद

शिवप्रसाद बाबू सामाजिक तौर पर बहिष्कृत किए जाते रहे क्योंकि वे अंग्रेजों के पक्षधर थे। यहां तक कि उनके शिष्य़ भारतेन्दु हरिश्चंद्र का गुट भी उन्हें सरकारी मुलाजिम कहकर खारिज करता रहा।

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बात बोलेगी: क्या आप प्रबुद्ध वर्ग से हैं? तो जज साहब का कहा मानिए…

अगर ऐसी कोई युक्ति निकाल सकें कि दो दिन पीछे जा सकें तो लखनऊ में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में शिरकत कर आइए, जहां इसी तरह के पर्यायवाची का सार्वजनिक रूप से निर्माण हुआ है। पहले यह सम्मेलन ब्राह्मण सम्मेलन था, उसे कुछ रोज़ पहले प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन कह दिया गया। इसका तात्पर्य यही हुआ कि जो बौद्धिक हैं वो ब्राह्मण हैं और इसके उलट व समानान्तर- जो ब्राह्मण हैं वो बौद्धिक हैं। इसी तर्ज पर जो आलोचना करें, सलाह दें, वो बुद्धिजीवी हैं। जो बुद्धिजीवी हैं वो सलाह दें और आलोचना करें!

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तन मन जन: कोरोनाकाल में आम लोगों की जान बचाती होमियोपैथी एवं आयुष पद्धतियां

भारत जैसे गरीब व विकासशील देश में सस्ती, सुलभ एवं सरल वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति की मान्यता को लेकर सरकार व अधिकारियों आदि के नकारात्मक रवैये के पीछे मैं उनके एलोपैथिक माइन्डसेट को जिम्मेवार मानता हूं। मेरा अनुभव तो ऐसा भी है कि सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में एक बड़े अधिकारी जिनकी पत्नी और बेटा स्वयं होमियोपैथ हैं, वे भी होमियोपैथी को आगे बढ़ता नहीं देखना चाहते। कारण होमियोपैथी के प्रति एलोपैथी का पूर्वाग्रह ही लगता है।

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हर्फ़-ओ-हिकायत: सात बनाम सत्तर बनाम सात सौ साल के बीच फंसे युवाओं का इतिहास-रोग

मनोज मुंतशिर शानदार लिखते हैं और बहुत शानदार तरीके से वे राष्ट्रीय बहस के केन्द्र में आ गए हैं, लेकिन इस्लाम के भारत अभियान के जिस हिस्से को वो रक्तरंजित बताकर अपनी मार्केटिंग कर रहे हैं उसके आगे-पीछे के इतिहास में उसी मिट्टी में मिल जाने की इतनी कहानियां हैं कि मनोज को सोचना पड़ जाएगा कि उन्हें किस कहानी पर यकीन है।

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छान घोंट के: 60 फीसदी मौतों के पीछे छुपी दूसरी महामारी NCD पर बात करने का यही सही वक्त है!

देश में एफओपीएल विनियमन लाने का इससे बेहतर समय कोई नहीं होगा जब कोविड महामारी ने बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य के सार्वजनिक बहस के केंद्र स्तर पर ला दिया है, साथ ही हर भारतीय की कल्पना को पकड़ लिया है। बच्चों और युवा आबादी में बढ़ते मोटापे और एनसीडी के उच्च प्रसार को देश दूसरी महामारी के रूप में देख रहा है।

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बात बोलेगी: बिकवाली के मौसम में कव्वाली

आर्थिक विभाजन, सामाजिक विभाजन, सांप्रदायिक विभाजन, वैचारिक विभाजन और कुछ नहीं तो रंग, कद, काठी, नाक की सिधाई, चपटाई, मोटाई के आधारों पर मौजूद विभाजन सरकारों के लिए सबसे मुफीद परिस्थितियां हैं। इनके रहने से एक ऐसी एकता का निर्माण होता है जिससे सार्वजनिक संपत्ति को अपना मानने की भूल लोग नहीं करते।

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हर्फ़-ओ-हिकायत: तालिबान बनाम आठ सौ साल पुराने ‘अखंड भारत’ की इकलौती महिला सुल्तान

तालिबान द्वारा महिलाओं के खिलाफ घोर हिंसा को देखकर यकीन नहीं होता है कि 1192 में मोहम्‍मद गोरी के हिन्दुस्तान फ़तह का अभियान शुरू करने के दस वर्ष बाद ही गोरी के गुलाम इल्‍तुतमिश की सैन्य शासन व्यवस्था की कमान उसकी बेटी रजिया के हाथों में थी।

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