चुनावीबिहार-3: ज्यादा दिमाग मत लगाइए, बस महीने भर की बात है…!

भाजपा में कम्युनिकेशन-गैप इतना बढ़ गया है कि अब सरेआम-सरेशाम जूतमपैजार हो रही है, लट्ठ बरस रहे हैं। परसों भाजपाइयों ने पप्पू यादव की जाप (जन अधिकार पार्टी) के कार्यकर्ताओं की तुड़ाई की, तो आज अपने ही मंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुर्दाबाद के नारे बुलंद कर दिये।

Read More

20/9/20: “अख़बार नहीं, आंदोलन” करने वाले एक संपादक की मौत का दिन

आज जब कृषि विधेयक पर ध्वनि मत से मतदान हो रहा था तो हरिवंश जी की निगाहें बिल के पन्ने पर थींं। आज एक जो अजब सी बात हुई वह यह थी कि मतदान कराते वक्त उन्होंने सदन की ओर आँख उठाकर नहीं देखा कि किसने बिल के समर्थन में हाँ कहा और किसने नहीं?

Read More

चुनावीबिहार-2: सौ लुकार, एक लबार, हवाई सौगात झारमझार

लालू प्रसाद को खुद उनके बेटे ने वनवास दे दिया है। कोर्ट भले ही उनको अक्टूबर के अंत में रिहा करने को तैयार हो गया है, लेकिन तेजस्वी ने अभी ही उनको मुक्त कर दिया है। आरजेडी के पोस्टर्स में इस बार उनके सबसे बड़े आइकन लालू प्रसाद यादव मौजूद नहीं हैं।

Read More

नरेंद्र मोदी को ‘राजधर्म’ सिखाने वाले दिवंगत ‘भारत रत्‍न’ के राज में विनिवेश घोटाला

खबर है कि सीबीआइ की जोधपुर स्पेशल कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी सहित कुछ लोगों पर तुरंंत मुकदमे दायर करने का आदेश दिया है. यह उदयपुर के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को कौड़ी के मोल बेच देने जैसे कारनामे के लिए किया गया है. श्री शौरी के विनेवेश मंत्री होते यह काम हुआ था.

Read More

चुनावीबिहार-1: भाजपा के एप्‍पल और ब्‍लूटूथ में फंसी संघ की धोती

भाजपा में ओल्ड गार्ड के नाम पर संघ के धोतीछाप प्रतिनिधि हैं, तो चुनावी कमान युवा एप्पलधारी रंगरूटों ने संभाल रखी है। यहां कम्युनिकेशन गैप की वजह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। भाजपा ने कॉरपोरेट स्टाइल में पूरे चुनाव को रंग दिया है।

Read More

राजनीति या लोकनीति? विनोबा के जन्‍मदिवस पर याद रखने लायक कुछ सबक

लोकनीति के बिना लोकतंत्र ठहर नहीं सकता है और न ही लोकसत्ता चरितार्थ हो सकती है। किसी भी समाज व राष्ट्र के नागरिकों के चरित्र का आधार ही लोकनीति है।

Read More

तीन साल हो गया लेकिन वाल्‍व आज भी बंद है…

प्रिंसिपल वापिस आये और वापिस से पानी की समस्या के बारे में हमसे पूछा! हमने भी वही उत्तर दिया जो वो सोच रहे थे! मैं वापिस लौट रहा था और हैरान था ये सोचकर कि वाल्व खोलने पर वो पानी तो आ जाएगा परन्तु अपनों को ऊपर उठाने हेतु किये गये इस कार्य से प्राचार्य साहब का पानी हमारी आँखों से उतर गया था!

Read More

हिंदुत्‍व की सांस्‍कृतिक गुलामी से आज़ादी का रास्‍ता पेरियार ललई सिंह से होकर जाता है

ललई सिंह जी ने अपने वक्तव्य, कृतित्व, रचना, और प्रयासों से हजारों साल की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गुलामी से मुक्ति का रास्ता प्रशस्त किया। 80 और 90 के दशक तथा इक्कीसवीं सदी में उनके वारिसों ने उसके खिलाफ जाते हुए पूरी तरह से उस सामाजिक आंदोलन एवं जन जागरूकता के लंबे कार्यक्रम को रोक सा दिया है।

Read More

बी.पी. मण्‍डल: एक मुसहर को सांसद बनाने वाला ओबीसी समाज का मसीहा

सामाजिक न्याय और सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई के तत्कालीन नेतृत्वकर्ता बी. पी. मण्डल का जन्म 25 अगस्त, 1918 को बनारस में हुआ था। बी. पी. मण्डल का जन्म जब हुआ तो उनका परिवार बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था।

Read More

अब जनता खुद खांड़ा खड़काए!

यह सही है कि हम दुनिया की पाँचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं लेकिन यह मोर का नाच है क्योंकि 1 प्रतिशत सेठों के हाथ में देश की 60 प्रतिशत संपदा है।

Read More