
खुद में अलोकतांत्रिक मीडिया कैसे कर सकता है लोकतंत्र की रक्षा?
‘लोगों के लिए’ होने की पहली शर्त है ‘लोगों के द्वारा’ होना। किसी भी संस्था को अपने स्वरूप में लोकतांत्रिक होने के लिए उसमें हर एक वर्ग, जाति, समुदाय की …
Read MoreJunputh
‘लोगों के लिए’ होने की पहली शर्त है ‘लोगों के द्वारा’ होना। किसी भी संस्था को अपने स्वरूप में लोकतांत्रिक होने के लिए उसमें हर एक वर्ग, जाति, समुदाय की …
Read Moreब्रिटिश साम्राज्यवाद तो भगत सिंह को न डरा पाया न हरा पाया किन्तु वैज्ञानिकता की बुनियाद पर टिके आधुनिक भारत के निर्माण की भगत सिंह की संकल्पना से एकदम विपरीत एक अतार्किक, अराजक और धर्मांध भारत बनाने कोशिशों का मुकाबला वे किस तरह करते इसकी तो कल्पना ही की जा सकती है।
Read Moreसागर सरहदी सिनेमा से जुड़े उन विरले लोगों में से हैं, जो घंटों किताबें पढ़ना पसंद करते थे. मुंबई के सराय कोलीबाड़ा इलाके में स्थित उनके घर में दीवारों के समानांतर आलमारियों में किताबें भरी पड़ी हैं. उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कोई पुरानी लाइब्रेरी के बीच रह रहा हो.
Read Moreयह पर्व सर्दी का अंत और हल्की-हल्की गर्मी का आगाज़ होता है, जब मौसम अधिक रोमांचित हो जाता है, जिस समय हर पहाड़ों पर नए-नए फूलों-पौधों का जन्म होते दिखता है। बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल और और इन्हीं फूलों की तरह बच्चों के खिले हुए चेहरे…
Read Moreआज की युवा पीढ़ी के दिमाग से इस घटना और इसके महत्व को बताने के लिए 91 साल पहले हुई उस ऐतिहासिक यात्रा के केंद्र पर उन स्मृतियों को सहेजने के लिए एक स्मारक बनाया गया है।
Read Moreइस मामले में क्षेत्रीय फिल्मों की स्थिति काफी अच्छी है। खासकर दक्षिण में तमिल, कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों में किसानों के ऊपर फिल्में अब भी बन रही हैं। पिछले एक दशक में मराठी सिनेमा में भी इनकी संख्या बढ़ी है।
Read Moreदुनिया के अन्य विकसित देशों से इस आन्दोलन की मांगों, अधिकारों और न्याय के लिए समर्थन निरंतर मिल रहा है। भारत के अन्य राज्यों में महापंचायतों के विस्तार से जो जागरूकता समाज के विभिन्न वर्गों में उभर रही है वो न्याय व अधिकारों के संघर्ष के स्पष्ट संकेत हैं।
Read Moreवे अमूर्त से सैद्धान्तिक सवालों पर बहस नहीं करते थे। उनके विचारों का स्रोत कहीं बाहर-पुस्तकीय ज्ञान में न था, राजनीतिक हस्तक्षेप में उनका विश्वास बढ़ रहा था। उनके मन में एक आशा पनप रही थी। और जब ऐसा कुछ हुआ, तो रेणु अचानक सक्रिय हो गए।
Read Moreइन नए नियमों में नागरिकों की प्राइवेसी की कोई चर्चा नहीं है, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, न ही यह स्थानीय मीडिया संस्थानों की मेहनत को हड़पने वाले इन मध्यवर्ती प्लेटफार्मों को किसी प्रकार के भुगतान के लिए बाध्य करता है।
Read Moreसिर्फ़ यूपी-बिहार नहीं, सोचने बैठिये और कुल लोक सभा की सीटों पर नज़र दौड़ाइए, तो पाएंगे कि भारत की राजनीति की दशा और दिशा भारत के सभी हिंदी-भाषी प्रदेश ही निर्धारित करते हैं। और ऐसा इसलिए क्योंकि लोक सभा की लगभग आधी सीटें अकेले हिंदी भाषी प्रदेशों में हैं।
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