‘सोशल डिस्टैंसिंग’ का सरकारी प्रयोग बंद करने सम्बंधी निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नवायन ने अदालत से दरखवास्त की है कि सरकारों को कहा जाए कि “सोशल डिस्टैंसिंग” की जगह वे “फिज़िकल डिस्टैंसिंग”, “इंडीविजुअल डिस्टैंसिंग”, “डिज़ीज़ डिस्टैंसिंग” या “सेफ़ डिस्टैंसिंग” का प्रयोग करें।

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न रैली, न सभा, न आयोजन! 134 साल में पहली बार वेबिनार पर मनाया गया मजदूर दिवस

इंदौर में श्रम संगठनों, जन संगठनों, कला-संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों एटक, सीटू, सन्दर्भ, प्रलेस, इप्टा, एन. एफ. आई. डब्ल्यू. और रूपांकन के संयुक्त तत्वाधान में एक अनूठा और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया।

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प्रेस स्वतंत्रता दिवसः उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और धमकियों पर CPJ की विस्तृत रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की यात्रा के दौरान, पत्रकारों ने सीपीजे को बताया कि उनके ऊपर आपराधिक आरोपों के लगने और शारीरिक हमले होने का खतरा बढ़ गया है।

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दुनिया के मजदूर थके हैं, पस्त हैं, अपनी मुक्ति के बारे में वे नहीं सोच पाएंगे!

मज़दूरों से क्रांति या विरोध की उम्मीद करना. ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ है. उसके लिए या तो क्रांतिकारी मज़दूर की विशेष पृष्ठभूमि होनी चाहिए या फिर उसे अन्य वर्ग से नेतृत्व मिले.

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काश, कोई मजदूर अनुवादक होता तो तुम अभागे न होते, मेरे मजदूर साथियों!

क्या तुम्हें लेनिन के बारे में पता है? मुझे पता है। उनके संकलित कार्य 40 अंकों में प्रकाशित हुए हैं, एक का मूल्य 2,000 रुपए है। क्या कभी उनको, अपने भाग्यविधाता को पढ़ पाओगे? इसलिए अभागे हो तुम।

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एशिया के राष्ट्राध्यक्षाें से कैद पत्रकारों को छोड़ने की अपील, 74 अपीली संगठनों में CPJ, CAAJ और PVCHR

अभियान शुरू किये जाने के बाद से लेकर 31 मार्च तक कम से कम पांच पत्रकारों को रिहा किया गया है हालांकि उसके बाद भी कुछ देशाें में पत्रकारों की गिरफ्तारी की गयी है।

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कोविड -19 के बाद की दुनिया को कोविड-19 के पहले की दुनिया से बेहतर बनाएं: एस. पी. शुक्ला

वेबिनार की शुरुआत विनीत तिवारी द्वारा दिए गए लेनिन के एक संक्षिप्त जीवन परिचय से हुई। जिसमें उन्होंने लेनिन के लेनिन बनने की प्रक्रिया को उनके परिवार की पृष्ठभूमि, उनके क्रांतिकारी भाई अलेकज़ान्द्र के फाँसी पर चढ़ाए जाने, प्लेखानोव, बाकुनिन, वेरा जासुलिश, टॉलस्टाय, गोर्की, क्रुप्सकाया आदि के सन्दर्भों के ज़रिए प्रस्तुत किया।

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आनन्द तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा व अन्य के साथ एकजुटता का बयान

डॉ. तेलतुंबड़े और श्री नवलखा को UAPA के निरंकुश कानून के तहत जेल भेजा गया और यह हुआ डॉ. आंबेडकर की जयंती के दिन

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