बात बोलेगी: हिंदू थक कर सो गया है तब तो ये हाल है, जागेगा तो क्या होगा डाक साब?

डॉ. साहब की चिंता समझ में आती है, लेकिन उसका निदान वो किससे मांग रहे हैं यह समझ नहीं आया, हालांकि उन्होंने देश का ध्यान इस महान तथ्य की तरफ दिलाया है कि यह देश दो-दो महान सत्ताओं के संरक्षण में मानवाधिकारों से सम्पन्न जम्हूरियत के मज़े लेता आ रहा है।

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पंचतत्व: अब भी दस साल का वक्त है, संभल जाइए वरना जीते जी प्यासा मरना पड़ सकता है!

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन, ये चार देश मिलकर दुनिया के सालाना भूमिगत जल का आधे से अधिक हिस्सा हड़प लेते हैं. इसलिए इन देशों में नदी बेसिनों में जलभंडार का रिचार्ज होना बेहद अहम है क्योंकि खेती, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और विकास की तकरीबन सारी गतिविधियों के लिए पानी अपरिहार्य है.

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दक्षिणावर्त: या तो चतुर या फिर घोड़ा, कॉमरेड! दोनों एक साथ नहीं चलेगा

सूचनाओं के महाविस्फोट के दौर में वैसे भी गारबेज अधिक है, गरिमामय सूचना बेहद कम। अगर हम अपनी कसौटी भी एक न रखेंगे, तो मामला फिर गड़बड़ होने वाला ही अधिक है।

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तिर्यक आसन: आत्मा से ब्रह्म तक पसरा श्रेष्ठता का भूत

आधुनिक कथाओं में मानवताविरोधियों को चकमा देने वाले पात्रों की संख्या अत्यधिक है, जो अपने प्राण और आत्मा को शरीर से बाहर रखते हैं। आधुनिक दौर के ऐसे पात्र रियल स्टेट, फिल्म निर्माण, मीडिया इंडस्ट्री, धर्म आदि नामक गुल्लक में धन नामक अपने प्राण को सुरक्षित रखते हैं। गुल्लक में प्राण सुरक्षित रखने के बाद चिंता हुई, आत्मा कहाँ छुपाकर रखी जाए।

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बात बोलेगी: काया की कराह और निज़ामे मुल्क की आह के मद्देनज़र एक तक़रीर…

आपने या किसी ने भी कभी साँप के पैर देखने की कोई चेष्टा की? नहीं की होगी। आप कह देंगे कि पैर देखने जाएंगे तो वो डस लेगा। यानी आप इस डर से उसके पैर देखने की कोशिश नहीं करते हैं और बेसबब उसके बारे में बेवफाई के दर्द भरे नगमे गाने लगते हैं। अन्तर्मन से पूछिए कि क्या आपका ये रवैया ठीक है?

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राग दरबारी: किस्से और हकीकत के बीच इमरजेंसी

कृष्ण कौशिक तो सूचना व मीडिया की बीट कवर करने वाले पत्रकार हैं इसलिए उन्‍हें यह खबर लिखने की जरूरत पड़ी होगी, लेकिन रितु सरीन तो इन देश की जानी-मानी खोजी खबर करने वाली पत्रकार हैं। क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि जब भी ईडी या सीबीआई किसी के घर या दफ्तर पर छापे मारती है (अगर वह जेनुइन छापे भी हों) तब उस व्यक्ति का फोन व लैपटॉप सबसे पहले अपने कब्जे में ले लेती है?

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पंचतत्व: विकास को संतुलन चाहिए और चैनलों को विज्ञान रिपोर्टर वरना ग्लेशियर ‘टूटते’ रहेंगे!

ग्लेशियर, मोरेन और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के बीच के अंतर को बताते हुए अगर रिपोर्टिंग होती तो लगता कि पर्यावरण को लेकर हमारा मीडिया साक्षर है. ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे टीवी चैनलों को विज्ञान रिपोर्टरों की सख्त जरूरत है.

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दक्षिणावर्त: इंसाफ की डगर पर ‘पहचान’ की पूंजी और ‘लिन्चिंग’ का खाता

अगर पुलिस का आधिकारिक बयान दिल्‍ली में सही माना जाना है तो फिर बाकी जगह भी उसका मान रखा जाना था। अगर नहीं, तो फिर दिल्‍ली में भी झगड़े वाली थ्‍योरी का कोई अर्थ नहीं है। क्‍या पुलिस की तफ़्तीश और बयान कोई सुविधा है? जिसे जब चाहे सामने रख दें और जब चाहे गलत करार दें?

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आर्टिकल 19: नेता ने ऐंकर को पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया, क्या मालिक को कुछ समझ में भी आया?

कितने शर्म की बात है कि एक नेता को आजतक इंडिया टुडे जैसे देश के विशाल मीडिया घराने के मालिकों और मुलाजिमों को पत्रकारिता का ट्यूशन देना पड़ रहा है। जब ममता बनर्जी राहुल कंवल की बखिया उधेड़े हुए थीं तो आजतक इंडिया टुडे ग्रुप के बुजुर्ग मालिक अरुण पुरी कसमसा रहे थे। लेकिन वो करते भी क्या?

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तिर्यक आसन: भला-चंगा पगुराता विमर्शकार और बीमार विमर्श

पहले वक्ता के रूप में जैसे ही सुधारक ने माइक थामी, लगा जेठ की दोपहर में तपते वन पर रिमझिम-रिमझिम, रुमझुम-रुमझुम होने लगी। बारिश के इंतजार में भूमिगत हुए दादुर टर्राते हुए बाहर आ गए।

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