यहां चालीस मौतों पर हंसी-मज़ाक क्यों चल रहा है?

बिहार में किसी भी समस्या पर आप चर्चा करेंगे तो जवाब में बाहुबली विधायक अनंत सिंह का वह बहुचर्चित वीडियो-संवाद सुनने को मिल जाएगा, जिसमें वह पुरुषों के अंग विशेष से शासन की तुलना कर रहे होते हैं। कुल मिलाकर हाल बतर्जे जॉन एलिया हैः हाल ये है कि अपनी हालत पर / गौर करने से बच रहा हूं मैं…

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भारत में बाल अधिकार समझौते के तीन दशक: सफर, पड़ाव और चुनौतियां

भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ बाल संधि को स्वीकार किये जाने के 30 साल पूरे होने का यह मौका खास है। इस दौरान हुई उपलब्धियों का जश्न जरूर मनाया जाना चाहिए लेकिन इसके साथ यह मौका देश बाल अधिकारों को लेकर नये संकल्पों और उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का भी है।

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गुजरात चुनाव सत्ता को कांग्रेस द्वारा दिया गया ‘वाकओवर’ था! कुछ जरूरी बिन्दु

गुजरात चुनाव का कांग्रेस के लिए एक स्पष्ट सन्देश यही है कि वह मास पॉलिटिक्स के अपने सांगठनिक राजनैतिक तंत्र पर पुनः विचार करे। अन्यथा उसकी जगह आप पार्टी लेने को तैयार है।

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कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव से मातृ मृत्यु दर के मामले में तेलंगाना देश में तीसरे स्थान पर

आश्चर्य की बात नहीं है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर एमएमआर में केवल 25 फीसदी की कमी आई है, तेलंगाना ने 2014 में 92 से 2020 में 53 फीसदी (एमएमआर) की भारी कमी दर्ज की है।

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याराना पूंजीवाद की पराकाष्ठा: भाजपा की चुनावी कामयाबी और चुनावी बॉन्ड का रिश्ता

। 2020-21 के अंत तक सभी राष्ट्रीय दलों को चुनावी बांड से मिले चंदे का 80 प्रतिशत चंदा भाजपा को मिला और सभी राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय दलों को मिलाकर मिले चंदे का 65 प्रतिशत भाजपा को मिला। जाहिर है कि भाजपा चुनावी बांड योजना की सबसे बड़ी लाभार्थी है और उसके कुल चंदे का लगभग दो-तिहाई अब चुनावी बांड के माध्यम से आ रहा है।

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आजमगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: विकास के नाम पर लूट और विनाश का एक और खेल

लोग यह पूछ रहे हैं कि आजमगढ़ के आसपास वाराणसी, कुशीनगर, गोरखपुर, अयोध्या और अब तो लखनऊ (क्योंकि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बन जाने से दो-ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचा जा सकता है) में भी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे होते हुए आखिर यहां हवाई अड्डे की क्या जरूरत है और दूसरा बनाना भी है, तो उपजाऊ जमीन पर क्यों बनाया जा रहा, कोई बंजर भूमि क्यों नहीं चुनी गई?

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‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी और संघ का लोकप्रिय दुष्प्रचार

इंदिरा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए इस तथ्य को भी संज्ञान में रखा जाना चाहिए कि उनकी हत्या से कुछ दिन पहले ख़ुफ़िया विभाग ने उन्हें सूचित कर दिया था कि एक समुदाय विशेष के उनके अंगरक्षकों से उन्हें खतरा है और इसलिए उन्हें वे हटा दें। उन्होंने यह कहते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया कि हो सकता है सूचना सही हो लेकिन एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का प्रमुख होने के नाते वे ऐसा नहीं कर सकतीं।

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ब्रिटेन के अल्पसंख्यक सुनक बनाम भारत की बहुसंख्यक सनक: एक विडंबना के दो पहलू

ऋषि सुनक का ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनना एक सुखद आश्चर्य है। विडंबना यह है कि ब्रिटेन के जिस उदार वातावरण ने ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया है, उसी माहौल में उनसे इस उदारता को संकीर्णता में बदलने की अपेक्षा भी की जाएगी।

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आज़ाद भारत में दलित सशक्तिकरण के तीसरे चरण की शुरुआत

भाजपा सरकार द्वारा उन्हें कमजोर करने के इन षड्यंत्रों से दलित वर्ग में बेचैनी है। भाजपा के लिए भी अब इन्हें रोक पाना चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में कांग्रेस खड़गे के चेहरे और राहुल और प्रियंका गांधी के दलितों के पक्ष में खड़े रहने वाले नेता की छवि के मिश्रण से हिंदी बेल्ट में इन्हें फिर से अपने साथ ला सकती है।

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कांग्रेस के संकटकालीन अध्यक्ष की वैचारिक व रणनीतिक चुनौतियां

नवनिर्वाचित अध्यक्ष खड़गे के लिए आने वाला समय बहुत चुनौतीपूर्ण है। सबसे बड़ी चुनौती तो कांग्रेस के उस वैचारिक आधार को पुनर्जीवित और पुनर्प्रतिष्ठित करने की है जो अहिंसक संघर्ष, सेवा, सहयोग, समावेशन और बहुलताओं की स्वीकृति जैसी विशेषताओं से युक्त है। बिना वैचारिक प्रतिबद्धता के वर्तमान फासीवादी उभार का मुकाबला असंभव है।

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