किसान आंदोलन के नेतृत्व को रचनात्मक तरह से अपनी शांतिपूर्ण छवि को वापस हासिल करना होगा
योगेंद्र यादव जैसे नेता तो इल्जाम लगाए जाने के पहले से ही गलती मानने और कृत्य की निंदा करने को तैयार बैठे थे जैसे चौरी-चौरा कांड हो गया हो और गाँधी जी की तर्ज पर इन्हें भी आंदोलन वापस लेने का ऐतिहासिक मौका मिला हो। जो हुआ, वैसा होना एक बड़ी चूक है लेकिन इतनी बड़ी भी नहीं कि आप सरकार द्वारा परोसी आंदोलन विरोधी हर खबर को सच मान लें और उसी रौ में बह जाएं।
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