‘सभ्यताओं के विकास के साथ धर्मग्रंथों के शाब्दिक नहीं, संवेदनात्मक विवेचन की आवश्यकता’!


कसया, कुशीनगर। बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के भन्ते सभागर में सर्व धर्म भाईचारा एवं राष्ट्रीय एकता विषयक आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने आपसी प्रेम, बन्धुत्व व राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एसोसिएट प्रो. गौरव तिवारी ने कहा कि खुद के धर्म या मजहब को सबसे अच्छा मानते हुए दूसरे के प्रति सम्मान का भाव न रखना आज के समय में धार्मिक सद्भाव के कमजोर होते जाने का सबसे बड़ा कारण है। भारतीय संस्कृति आरंभ से ही विरोधी मतों और विचारों के प्रति सम्मान रखने की रही है। इसीलिए यहां विभिन्न, पंथों और मत मतांतर के लोग एक साथ सहिष्णुता के साथ रहते आए हैं। प्रत्येक धर्मग्रंथ एक समय में तात्कालिक परिस्थितियों में लिखा गया है बदले हुए समय में सभ्यताओं के विकास के साथ उसकी शाब्दिक विवेचन नहीं बल्कि संवेदनात्मक विवेचन की आवश्यकता है। तभी हमारा धार्मिक परिवेश कट्टरता से मुक्त हो पाएगा।

गांधीवादी विचारक प्रो. मोहम्मद आरिफ ने कहा कि बुद्ध और गोरखनाथ जी की वाणी सर्वजन के लिए है। धर्म और साझी विरासत आज कटघरे में खड़ा है जिसे बचाने की जरूरत है। हजारों साल से हम सब एक साथ रह रहे हैं। देश की आजादी के मूल्य समता, बन्धुता, प्रेम व न्याय है और इसी आधार पर देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गयी। उन्होंने भारत की परिकल्पना पर चर्चा करते हुए कहा कि बसुधैव कुटुम्बकम व सेवा परमो धर्म: के मूलमंत्र व सर्वे भवन्तु सुखिनः की परंपरा को कायम रखने से ही सामाजिक एकता, सामाजिक शांति और सामाजिक न्याय कायम होगा। इतिहास के अनेक दृष्टांत के जरिए उन्होंने साझी विरासत को रेखांकित किया।



धराधाम मन्दिर, गोरखपुर के निर्माणकर्ता डॉ. सौरभ पाण्डेय ने कहा कि सर्व धर्म समभाव को लेकर सद्भावना की ओर बढ़ना होगा तभी सामाजिक सद्भाव संभव है। सद्भावना कठिन है लेकिन भाईचारा देश की आवश्यकता है। इसलिए प्रेम का संदेश मजबूत व सुखी समाज के लिए देना होगा। उन्होंने बताया कि कृष्ण, ईसा, बुद्ध, गांधी के अंतिम जीवन मे क्या हुआ यह किसी से छिपा नहीं है। ईश्वर हमारे हृदय में बसते हैं। आलोचना के बजाय भेद, नफरत से बचना होगा।

सामाजिक कार्यकर्ता शिवाजी राय ने कहा कि बुद्ध ने विश्व को अहिंसा का संदेश दिया। आज का सबसे बड़ा संदेश मानवता होनी चाहिए लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान ने मानवता के पुजारियों की हत्या की। आखिर वो लोग कौन हैं जो सामाजिक माहौल को बिगाड़ रहे हैं? वह धर्म जिसमें करुणा न हो, प्रेम न हो, गरीबों के प्रति आस्था न हो वह कोई धर्म नहीं। पूंजी की ताकत से देश को रौंदा जा रहा है और देश की सम्पति लूटी जा रही है। जरूरत है सबके विकास के साथ आपसी सद्भाव को बनाये रखें।

सेवानिवृत्त जज सगीर आलम ने कहा कि एक इंसान के लिए पूरी कायनात का रहना जरूरी है। हमें मोहब्बत का माहौल अच्छे कम्युनिटी के लिए बनाना होगा। भन्ते डॉ. नंद रतन ने बुद्ध के उपदेशों सभी प्राणियों के सुख के लिए है। इसी क्रम में राजीव गांधी फाउंडेशन के हिदायतुल्लाह, पत्रकार कृपा शंकर राय, एडवोकेट जितेंद्र पटेल, पूर्व डीपीआरओ जनार्दन शाही आदि ने संबोधित किया।

अतिथियों का स्वागत इद्रीश, पूर्व डायट प्राचार्य बीपी गुप्ता, वाजिद अली, डॉ राघवेंद्र सिंह, प्रधानचार्य दुर्गा प्रसाद यादव आदि ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। अध्यक्षता एडवोकेट विजय कुमार श्रीवास्तव व संचालन आयोजक व भाईचारा समिति के संयोजक अयोध्या लाल श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान अमीरुद्दीन कुरैशी, एखलाक अहमद लारी, गेंदा सिंह, संदीप कुमार सिंह, संजय सिंह,मोहन फिलिप, मोहम्मद कैश खान, स्वामीनाथ पटेल, पंकज कुमार श्रीवास्तव, मैनुद्दीन अंसारी, शंम्भू चौहान, श्री नारायण कुशवाहा, साकिर अली आदि मौजूूद रहे।


मोहम्मद आरिफ़ द्वारा जारी


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