बेदखली नहीं, आदिवासियों को जंगल पर अधिकार दे सरकार- AIPF


29 जून 2020, घोरावल (सोनभद्र): सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप वनाधिकार कानून के दाखिल दावेदारों को उनकी पुश्तैनी वन भूमि पर बेदखली से तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, उन्हें जमीन पर पट्टा दिया जाए और सरकार द्वारा शुरू किए जाने वाले पौधारोपण में फलदार वृक्ष लगाए जाएं इन वृक्षों की सुरक्षा व संचालन के लिए आदिवासियों और वनवासियों की ग्राम स्तर की सहकारी समितियों को कृषि वानिकी योजना के तहत जंगल पर अधिकार दिया जाए.

इस आशय का मांग पत्र आज ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट से जुड़ी आदिवासी वनवासी महासभा व मजदूर किसान मंच के नेताओं ने तहसीलदार घोरावल को दिया. प्रतिनिधिमंडल में आईपीएफ नेता कांता कोल, मजदूर किसान मंच के जिला महासचिव राजेंद्र सिंह गौड़, घोरावल प्रभारी अमर सिंह गोंड व श्रीकांत सिंह आदि लोग शामिल रहे.

प्रतिनिधिमंडल द्वारा दिए पत्रक में कहा गया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदिवासियों और वनवासियों की उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखली पर रोक लगाई हुई है. इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी शासनादेश जारी किया है और कहा है कि वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों का पुन: परीक्षण कराया जाए. खुद विशेष सचिव ने दौरा करके निर्देश दिए थे. बावजूद इसके घोरावल तहसील में वन विभाग द्वारा बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी घोरावल से वार्ता भी की गई तब भी यह बेदखली नहीं रोकी जा रही है. पेढ़ गांव में तो वनाधिकार कानून के दावेदारों की जमीन पर गड्ढा खोदकर वृक्षारोपण किया जा रहा है. यह न्यायालय की अवमानना है और यदि प्रशासन इसे रोकने की समुचित कार्यवाही नहीं करता तो विधिक कार्यवाही की जायेगी.

पत्र में कहा गया कि 1 जुलाई से शुरू हो रहे पौधारोपण कार्यक्रम में वन विभाग फलदार वृक्ष लगाए जाएं और इन वृक्षों की देखभाल व व्यवस्था के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई कृषि वानिकी योजना के तहत आदिवासियों व वनवासियों की ग्राम स्तरीय सहकारी समितियों को अधिकार दिया जाए. इससे पर्यावरण की सुरक्षा तो होगी ही साथी कोरोना महामारी के संकटग्रस्त दौर से गुजर रहे आदिवासियों व वनवासियों की आजीविका का भी इंतजाम होगा.

कांता कोल
जिला संयोजक
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट


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