मुलताई गोलीकांड में छुपे हैं मौजूदा किसान आंदोलन की कामयाबी के बीज

मुलताई गोलीकांड की खास बात यह है कि 12 जनवरी को गोली चालन कराने का षड्यंत्र करने वालों को सजा नहीं हुई, तीन मुकदमों में मेरे साथ-साथ तीन अन्य आंदोलनकारियों को आजीवन कारावास की सजा हुई। नेतृत्व करने के कारण मुझे 54 वर्ष की सजा सुनाई गई।

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सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उनकी दूरदर्शिता और लचीलेपन को याद करते हुए

सावित्रीबाई, जो अपने समय से आगे थीं, एक ऐसी महिला की ब्राह्मणवादी कल्पना के सामने नहीं झुकीं, जिसका जीवन दृढ़ता से और पूरी तरह से अपनी मातृ प्रवृत्ति से प्रेरित था। इसके बजाय, उन्होंने महिलाओं के व्यक्तित्व को एजेंसी और स्वायत्तता सौंपी, महिलाओं को भारतीय समाज के भीतर हाशिए की पहचान के रूप में मान्यता दी।

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मिटेंगे अब अपराधों के साये: किसान आंदोलन के अवसान पर दो कविताएं

सांत्वना बहुत लोग गेहूं की रोटी खाते हैं चावल खाते हैं कुछ ज्वार बाजरा मक्का भी खाते हैं दलहन तिलहन सब्जी और फल खाते हैं उनके विभिन्न उत्पाद और व्यंजन …

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किसान आंदोलनः ऐतिहासिक फतह और अब आगे

आज पूरा देश जानता है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र ही भाजपा की केन्द्र सरकार आज किसानों के सामने झुकने को मजबूर हो गयी है।

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पक्षियों के जौहरी सालिम अली की कहानी

सालिम अली ने कई पत्रिकाओं के लिए लिखा, मुख्य रूप से जर्नल ऑफ द बॉम्बे नेचुरल हिस्टरी सोसायटी के लिए लगातार लिखा। साथ ही उन्होंने कई लोकप्रिय और शैक्षिक पुस्तकें भी लिखी, जिनमें से कुछ अभी भी प्रकाशित नहीं हुई हैं। इसके लिए अली ने तहमीना को श्रेय दिया है जिसने इनकी अंग्रेजी में सुधार करने के लिए इंग्लैंड में अध्ययन किया था।

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अक्टूबर क्रांति और लेनिन की प्रासंगिकता

लेनिन की समाजवाद की अवधारणा दीर्घावधि की सोच पर आधारित रही जो वर्तमान की सच्चाइयों के साथ व्यावहारिक तालमेल पर आधारित थी। इसमें किसानों के प्रति संवेदना और तानाशाही शासन तंत्र की खामियों को दूर करना शामिल था।

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पुरुषों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य-समृद्धि का जिम्मा महिलाओं के सिर पर क्यों?

यदि समाज में ऐसे पर्व का भी प्रचलन हो जिसमें भाई, बहन की पूजा करे और पति, पत्नी की पूजा करे तो सामाजिक स्तर पर एक सामूहिक जागरूकता आएगी जिससे महिलाओं के प्रति पुरुषों का नजरिया आदर्श हो पाएगा और महिलाएं अधिक स्वतन्त्रता, सम्मान और समानता से आगे बढ़ेंगी।

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लता और सलामत: नफ़रतों की सरहद पर जलता नाकाम मोहब्बत का एक पुराना दीया

क्या आपको यह पता है कि क्वीन ऑफ मेलोडी कहलाने वाली लता मंगेशकर जिन्होंने संगीत की दुनिया पर आठ दशकों तक राज किया है वो किसी ऐसे इंसान की मोहब्बत में गिरफ्तार रहीं जो उनके करीब तो रहा मगर उनका कभी न हो सका! ये वो कहानी है जिनके बारे में कम लोग ही जानते हैं।

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खूब पहचान लो असरार हूं मैं, जिन्स-ए-उल्फत का तलबगार हूं मैं…

। दुर्भाग्य यह कि हमारे देश के नक्काद (आलोचक) उन्हें कभी इंकलाब के सांचे में फिट करते तो कभी उर्दू का कीट्स करार दे अपनी ऊर्जा जाया करते रहे। मजाज़ को मजाज़ की नजर से देखने की कोशिश नहीं की गई।

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मजरूह लिख रहे हैं अहले वफ़ा के नाम, हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह…

ये बहार भी क्या बहार है जो सब कुछ बहा कर ले चली है! चाहे वो साहित्य हो, अस्मिता हो, साझापन हो या संस्कृति।

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