अपने बच्चों को मोटापे और रोगों से मुक्त रखने के लिए पैकेट पर ‘चेतावनी लेबल’ की मांग उठानी होगी!

मस्तिष्क की कार्य क्षमता आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन पर निर्भर करती है। यह आपके शरीर और मस्तिष्क को अवसाद और तनाव की ओर ले जाता है। साथ ही अमिनो एसिड की पर्याप्त मात्रा न होने के कारण भी आप अवसादग्रस्त हो सकते हैं।

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चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले…

फ़ैज़ साहब के बारे में ये एक बात बहुत कम लोग जानते हैं। उसे प्रचारित भी नहीं किया गया। जब गांधीजी की हत्या हुई थी तब फ़ैज़ साहब “पाकिस्तान टाइम्स” के संपादक थे। गांधीजी की शवयात्रा में शरीक होने वे वहां से आए थे चार्टर्ड प्लेन से। और जो संपादकीय उन्होंने लिखा था, गांधीजी के व्यक्तित्व का बहुत उचित एतिहासिक मूल्यांकन करते हुए शायद ही कोई दूसरा संपादकीय लिखा गया होगा।

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‘अमरत्व का स्थान प्राप्त करने में लता को कितनी ठोकरें खानी पड़ीं यह सब था इन अंखियन आगे…’

जैसे ही मैं कमरे में दाखिल हुआ वह पुनः खिलखिलाकर हंस पड़ी और नाखून होठ से लगाकर चुप हो गयी। मैं कुछ प्यार से, उपालंभ के स्वर में यह कहता हुआ बाहर आ गया कि ऊपर तो तुम लजाकर भाग गयी थी। कहने पर भी वह गीत नहीं तुमने सुनाया और यहां गा भी रही हो, नाच भी रही हो। वह लड़की वहां से भी खिलखिलाकर हंसती हुई दूसरी तरफ निकल गयी।

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मुलताई गोलीकांड में छुपे हैं मौजूदा किसान आंदोलन की कामयाबी के बीज

मुलताई गोलीकांड की खास बात यह है कि 12 जनवरी को गोली चालन कराने का षड्यंत्र करने वालों को सजा नहीं हुई, तीन मुकदमों में मेरे साथ-साथ तीन अन्य आंदोलनकारियों को आजीवन कारावास की सजा हुई। नेतृत्व करने के कारण मुझे 54 वर्ष की सजा सुनाई गई।

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सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उनकी दूरदर्शिता और लचीलेपन को याद करते हुए

सावित्रीबाई, जो अपने समय से आगे थीं, एक ऐसी महिला की ब्राह्मणवादी कल्पना के सामने नहीं झुकीं, जिसका जीवन दृढ़ता से और पूरी तरह से अपनी मातृ प्रवृत्ति से प्रेरित था। इसके बजाय, उन्होंने महिलाओं के व्यक्तित्व को एजेंसी और स्वायत्तता सौंपी, महिलाओं को भारतीय समाज के भीतर हाशिए की पहचान के रूप में मान्यता दी।

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मिटेंगे अब अपराधों के साये: किसान आंदोलन के अवसान पर दो कविताएं

सांत्वना बहुत लोग गेहूं की रोटी खाते हैं चावल खाते हैं कुछ ज्वार बाजरा मक्का भी खाते हैं दलहन तिलहन सब्जी और फल खाते हैं उनके विभिन्न उत्पाद और व्यंजन …

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किसान आंदोलनः ऐतिहासिक फतह और अब आगे

आज पूरा देश जानता है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र ही भाजपा की केन्द्र सरकार आज किसानों के सामने झुकने को मजबूर हो गयी है।

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पक्षियों के जौहरी सालिम अली की कहानी

सालिम अली ने कई पत्रिकाओं के लिए लिखा, मुख्य रूप से जर्नल ऑफ द बॉम्बे नेचुरल हिस्टरी सोसायटी के लिए लगातार लिखा। साथ ही उन्होंने कई लोकप्रिय और शैक्षिक पुस्तकें भी लिखी, जिनमें से कुछ अभी भी प्रकाशित नहीं हुई हैं। इसके लिए अली ने तहमीना को श्रेय दिया है जिसने इनकी अंग्रेजी में सुधार करने के लिए इंग्लैंड में अध्ययन किया था।

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अक्टूबर क्रांति और लेनिन की प्रासंगिकता

लेनिन की समाजवाद की अवधारणा दीर्घावधि की सोच पर आधारित रही जो वर्तमान की सच्चाइयों के साथ व्यावहारिक तालमेल पर आधारित थी। इसमें किसानों के प्रति संवेदना और तानाशाही शासन तंत्र की खामियों को दूर करना शामिल था।

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पुरुषों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य-समृद्धि का जिम्मा महिलाओं के सिर पर क्यों?

यदि समाज में ऐसे पर्व का भी प्रचलन हो जिसमें भाई, बहन की पूजा करे और पति, पत्नी की पूजा करे तो सामाजिक स्तर पर एक सामूहिक जागरूकता आएगी जिससे महिलाओं के प्रति पुरुषों का नजरिया आदर्श हो पाएगा और महिलाएं अधिक स्वतन्त्रता, सम्मान और समानता से आगे बढ़ेंगी।

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