आनन्द तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा व अन्य के साथ एकजुटता का बयान


डॉ. तेलतुंबड़े और श्री नवलखा को UAPA के निरंकुश कानून के तहत जेल भेजा गया और यह हुआ डॉ. आंबेडकर की जयंती के दिन! अभी कुछ ही दिन पहले हमने वे हृदयविदारक विजुअल्स/तस्वीरें देखीं थीं जहां, हमारे लाखों देशवासियों को नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने सुदूर गांवों की ओर घिसटना पड़ा, जब उन्हें रातो रात बेघर, बेरोज़गार और आवागमन /यातायात के साधनों से वंचित कर दिया गया ।

वे भी भारतीय ही हैं, जिन्हें हमारे सविधान ने समान अधिकारों से सम्पन्न नागरिक बनाया है। ऐसा लग रहा है कि भारत का लोकतंत्रिक गणराज्य कोमा के हालात में जा रहा है। इसके अंग प्रत्यंग और इसका समूचा राजनीतिक तंत्र जैसे सुन्न, निष्क्रिय और संवेदनहीन हो गया है।

डॉ. आंबेडकर को याद करने और श्रद्धांजलि देने की कोई भी सरकारी रस्मअदायगी  कभी इतनी खोखली नहीं रही होगी जैसी इस साल 14 अप्रैल की! हमें भारत की जनता की अपराजेय भावना और बुद्धि पर भरोसा है। भारत ने इससे बड़ी से बड़ी चुनौतियों का मुकाबला किया है और जीत हासिल की है। उसके बेटे-बेटियों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

हम अपने सभी देशवासियों से अपील करते हैं कि घटनाक्रम पर गंभीरतापूर्वक मनन करें, थोड़ा आत्मनिरीक्षण करें और संविधान के बुनियादी उसूलों की रक्षा के लिए अपने को पुनःसमर्पित करें, चाहे उसके लिए जिस भी परिस्थिति का मुकाबला करना पड़े।

आनन्द तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा और उन लाखों अनाम भारतीय नागरिकों के साथ जिनका अपमान और उत्पीड़न हुआ है हम एकजुटता व्यक्त करते हैं और उनके संकट की घड़ी में हम उनके साथ अपने समर्थन का एलान करते हैं।

1.      एस. पी. शुक्ला पूर्व सदस्य योजना आयोग भारत सरकार

2.      जया मेहता

3.      विनीत तिवारी

4.      अनुराधा चेनोय

5.      कमल मित्र चेनोय

6.      अमरजीत कौर

7.      परंजय गुहा ठाकुरता

8.      सुकुमार मुरलीधरन

9.      बेन्नी कुरुविला

10.  अंतरा देव सेन

11.  लता सिंह

12.  सौरभ बनर्जी

13.  कुमार अम्बुज

14.  नंदनी सुदंर

15.  गौहर रजा

16.  विजय सिंह

17.  अचिन विनायक

18.  आनंद पट्वर्धन

19.  सी. के. राजू

20.  शरद चंद्र बेहर

21.  अशोक चौधरी

22.  अमित नारकर

23.  चमनलाल

24.  मानसी शर्मा

25.  शेखर मलिक

26.  बिनोय विश्वम

27.  बी युवराज

28.  अद्वैत पेडनेकर

29. मानसी पिंगले

30.  कल्पना मेहता

31.  अर्चिष्मान राजू

32.  कनीज़ फातिमा

33.  उमा भृगुबन्दा

34.  रुक्मिणी राव

35.  संतोष खरे

36.  अंकुरम सुमित्रा

37.  अखिलेश्वरी रामागौड़

38.  शरण्य नायक

39.  शीबा मीनाई

40.  सुव्रत राजू

41.  दीपक ढोलकिया

42.  फ्रेनी मानेकशा

43.  दिप्ती राज

44.  मंदाकिनी मल्लराम

45.  पद्मजा साव

46.  सारिका श्रीवास्तव

47.  कमल नयन काबरा

48.  अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

49.  एस. आर. दारापुरी

50.  वृंदा शुक्ला फड़के

51.  बीना शरीफ

52.  सुधा कोठारी


About जनपथ

जनपथ हिंदी जगत के शुरुआती ब्लॉगों में है जिसे 2006 में शुरू किया गया था। शुरुआत में निजी ब्लॉग के रूप में इसकी शक्ल थी, जिसे बाद में चुनिंदा लेखों, ख़बरों, संस्मरणों और साक्षात्कारों तक विस्तृत किया गया। अपने दस साल इस ब्लॉग ने 2016 में पूरे किए, लेकिन संयोग से कुछ तकनीकी दिक्कत के चलते इसके डोमेन का नवीनीकरण नहीं हो सका। जनपथ को मौजूदा पता दोबारा 2019 में मिला, जिसके बाद कुछ समानधर्मा लेखकों और पत्रकारों के सुझाव से इसे एक वेबसाइट में तब्दील करने की दिशा में प्रयास किया गया। इसके पीछे सोच वही रही जो बरसों पहले ब्लॉग शुरू करते वक्त थी, कि स्वतंत्र रूप से लिखने वालों के लिए अखबारों में स्पेस कम हो रही है। ऐसी सूरत में जनपथ की कोशिश है कि वैचारिक टिप्पणियों, संस्मरणों, विश्लेषणों, अनूदित लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से एक दबावमुक्त सामुदायिक मंच का निर्माण किया जाए जहां किसी के छपने पर, कुछ भी छपने पर, पाबंदी न हो। शर्त बस एक हैः जो भी छपे, वह जन-हित में हो। व्यापक जन-सरोकारों से प्रेरित हो। व्यावसायिक लालसा से मुक्त हो क्योंकि जनपथ विशुद्ध अव्यावसायिक मंच है और कहीं किसी भी रूप में किसी संस्थान के तौर पर पंजीकृत नहीं है।

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