अनंतर का लोकतंतर ऐसा ही होता है
अभिषेक श्रीवास्तव जनसत्ता में 20 अप्रैल को संपादक ओम थानवी ने अपने स्तम्भ ‘अनन्तर’ में जब ‘आवाजाही के हक में’ आधा पन्ना रंगा था, उसी दिन इस लपकी गई बहस …
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अभिषेक श्रीवास्तव जनसत्ता में 20 अप्रैल को संपादक ओम थानवी ने अपने स्तम्भ ‘अनन्तर’ में जब ‘आवाजाही के हक में’ आधा पन्ना रंगा था, उसी दिन इस लपकी गई बहस …
Read Moreबहुत दिन बाद किसी अखबार में कुछ कायदे का छपा है। आज का जनसत्ता पढि़ए- ओम थानवी के लिए नहीं, आशुतोष भारद्वाज के लिए- ठीक सामने वाले पन्ने पर। नहीं …
Read Moreशिवमंगल सिद्धांतकर ‘बाबा’ के जवाब पर कवि और ‘बाबा’ की पत्रिका के संपादक रहे रंजीत वर्मा ने अपनी टिप्पणी भेजी है। यह टिप्पणी परत दर परत ‘बाबा’ के जवाब का …
Read More”बाबा की मेज़ पर मोदी की शील्ड” नामक रिपोर्ट पर बाबा शिवमंगल सिद्धांतकर का जवाब आया है। जवाब क्यों आया यह समझ नहीं पाया मैं, क्योंकि उक्त रिपोर्ट बाबा से …
Read More(स्वीडिश लेखक यॉन मिर्डल ने स्वीडन के विदेश मंत्री को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें अपने प्रति भारत सरकार के रवैये का उन्होंने जि़क्र किया है। बहरहाल, चिट्ठी में कुछ …
Read MoreIn the garb of social responsibility, the Essar Group recently organised a storytelling festival for the ‘benefit’ of children in this Maoist-dense area. Apart from the organisers’ poorly disguised disdain …
Read Moreअजीब उबंतू, खाली, निरुद्देश्य, निरर्थक, व्यर्थ, असमर्थ दिन हैं ये। इतना कुछ हो रहा है और इतनी गति से कि कुछ भी नहीं आ पा रहा पकड़ में। इलेक्ट्रॉन की …
Read Moreजितेन्द्र कुमार चुनाव विश्लेषक और राजनीतिशास्त्री प्रोफेसर योगेन्द्र यादव हर चुनाव के बाद अक्सर टीवी पर बैठकर कहते हैं कि लोकतंत्र की जड़ें लगातार गहरी होती जा रही हैं (डीपेनिंग …
Read Moreश्री शिवमंगल सिद्धांतकर ”बाबा” मंगलेश डबराल के राकेश सिन्हा के साथ मंच साझा करने का विवाद अभी थमा भी नहीं था (आज ही जनसत्ता में मंगलेश जी की लंबी टिप्पणी …
Read MoreVidyarthee Chatterjee Saadat Hasan Manto: May 11, 1912 – January 18, 1955 If Saadat Hasan Manto had been living, he would have been a centenarian this year, thirty-five years …
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