हंस की गोष्‍ठी पर वरवर राव का खुला पत्र

क्रांतिकारी कवि वरवर राव प्रेमचंद जयंती पर हंस के सालाना कार्यक्रम में आए कई लोग जानते थे कि अरुंधति राय की सहमति के बगैर उनका नाम आमंत्रण में छपा था …

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मोर्चा संभालो अपना, वीरेनदा!

पलाश बिस्‍वास  कविता कैसे लिखी जाए या कोई व्‍यक्ति कवि कैसे कहलाए, इससे कहीं ज्‍यादा अहम बात यह है कि जो लिखा जा रहा है उसमें कविताई कितनी है। वह …

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हिंदी के लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, संस्‍कृतिकर्मियों और पाठकों का सामूहिक बयान

हम हिंदी के लेखक, कवि, बुद्धिजीवी, सांस्कृतिक कार्यकर्ता, ब्लॉगर, पत्रकार  और इंटरनेट पर सक्रिय पाठक देश के समक्ष उपस्थित तमाम चुनौतियों पर एतद्द्वारा अपना पक्ष रख रहे हैं तथा सम्बंधित …

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भूटान के चुनाव में भारत का बेशर्म हस्तक्षेप

आनंद स्‍वरूप वर्मा  भूटान में संपन्न 13 जुलाई के दूसरे आम चुनाव ने भारत सरकार की विदेश नीति के दिवालियेपन को एक बार फिर उजागर किया है। इस चुनाव में …

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कूढ़ मगज से रिसता मवाद: भाग मिल्‍खा…

अभिषेक श्रीवास्‍तव  किन्‍हीं दो व्‍यक्तियों के जीवन की तुलना अगर नहीं की जा सकती, तो उसी तर्ज पर उन दो व्‍यक्तियों के जीवन पर बनी फिल्‍मों की तुलना भी नहीं …

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पत्रकारिता का साम्राज्यवादी चेहरा: संदर्भ एस.पी. सिंह

सुरेंद्र प्रताप सिंह यानी एस.पी. पर जितेन्‍द्र कुमार के लिखे आलेख पर बहस अब तक फेसबुक समेत तमाम मंचों पर जारी है। यह लेख अब भी जितेन्‍द्र कुमार के ब्‍लॉग …

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