एसपी ”मूर्ख-मूर्खाओं” को ही रखते थे क्‍योंकि वे सवाल नहीं पूछते!

टेलीविज़न पत्रकारिता: संदर्भ एस.पी. सिंह  जितेन्‍द्र कुमार  बीते 27 जून को मीडियाखबर डॉट कॉम वेबसाइट द्वारा आयोजित पांचवें एस.पी. सिंह मीडिया कॉनक्‍लेव में समाचार चैनलों की खराब हालत के पीछे मंच पर …

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इतिहास का दुहराव भी कितना अश्लील हो जाता है!

जितेन्‍द्र कुमार  हिंदी के वरिष्‍ठ पत्रकार जितेन्‍द्र कुमार ने इतने बरसों में पहली बार सोशल मीडिया पर अपनी दखल देते हुए मंगलवार को अपना ब्‍लॉग शुरू किया जिसका नाम है ”यहां से देखो”। …

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आडवाणी की नियति है कि वे सूरज बनकर चमक नहीं सकते…

बीजेपी की गोवा कार्यकारिणी के बाद चौतरफा नरेंद्र मोदी और लालकृष्‍ण आडवाणी को लेकर चर्चा है। ऐसे में आडवाणी पर कई बरस पहले शुरुआती ”चौथी दुनिया” में लिखी एक प्रोफाइल …

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पर्यावरण बचाओ आंदोलन के 47 नारे

गांव छोड़ब नाहीं, जंगल छोड़ब नाहीं, मायेर माटी छोड़ब नाहीं, लड़ाई छोड़ब नाहीं  नदी का पानी और भूजल बोतल में बेचना बंद करो  धूप में बल्‍ब जलाना बंद करो  खेतों …

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ज़रूरत है एक सच्‍ची सैनिक कार्रवाई की…

फरवरी 2002 में जब गुजरात के मुस्लिमों को चुन-चुन कर मारा जा रहा था, तब बनारस में संकटमोचन के पास एक चाय की दुकान पर दैनिक जागरण के संपादकीय पन्‍ने …

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