कलकत्‍ता: जहां डॉन भी बेज़ुबान है…

अभिषेक श्रीवास्‍तव हर चीज़ में राजनीतिक नाक घुसेड़ने की आदत बहुत बुरी है। कलकत्‍ता से लौटे मुझे कितने  दिन हो गए हैं। मन में, दिमाग में, ज़बान पर, फोन पर …

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लाश के इंतज़ार में एक मज़ार: अरुंधति राय

अरुंधति राय  अफज़ल गुरु की सुनवाई पर दिसंबर 2006 में एक किताब आई थी ”13 दिसंबर- दि स्‍ट्रेंज केस ऑफ दि अटैक ऑन दि इंडियन पार्लियामेंट: ए रीडर”। इस पुस्‍तक …

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Mau Film Festival: शहादत को सिनेमा का सलाम

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इरोम शर्मिला पिछले 12 साल से भूख हड़ताल पर है। शर्मिला मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्सपा) को हटाने की मांग को …

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Sunday Review SBGR: ”अब हम खड़े हो गए हैं, तो और झेलाएंगे”

यू टू ब्रूटस… व्‍यालोक  “साहब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स” देखने के बाद निष्कर्ष के तौर पर दो-तीन बातें बिल्कुल साफ समझ में आती हैं। पहली, तो सामान्यीकरण का खतरा उठाते …

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राजेश की महानता का मैं आभारी हूं: रणधीर कुमार

रंग निर्देशक रणधीर कुमार  राजेश चन्द्र ने बहुत गहरे आरोप मुझ पर बड़े ही विस्तार से लगाए हैं। मैंने अपने स्तर पर कुछ स्पष्टीकरण देने की कोशिश की थी लेकिन मुझे …

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यह सफलता का नहीं गटर का रास्ता है साथी!

कुछ दिनों पहले ”समकालीन रंगमंच” नामक नई पत्रिका के पहले अंक के एनएसडी, दिल्‍ली में लोकार्पण पर हुए विवाद के संदर्भ में इसके संपादक रंगकर्मी राजेश चंद्र की ओर से …

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